भारतीय बाज़ार से विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹23,676 करोड़, कच्चे तेल और वैश्विक संकेतों ने बढ़ाई चिंता
लगातार दो महीने की खरीदारी के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सितंबर में भारतीय शेयर बाज़ार से दूरी बना ली है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, महीने के पहले 19 दिनों में ही FPI ने सेकेंडरी…
लगातार दो महीने की खरीदारी के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सितंबर में भारतीय शेयर बाज़ार से दूरी बना ली है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, महीने के पहले 19 दिनों में ही FPI ने सेकेंडरी मार्केट से 23,676 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। यह बिकवाली ऐसे समय में हुई है जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता निवेशकों की धारणा पर असर डाल रही हैं।
हालांकि, सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशकों का भरोसा प्राइमरी मार्केट यानी IPOs पर बना हुआ है। सितंबर में अब तक उन्होंने प्राइमरी मार्केट में करीब 2,703 करोड़ रुपए का निवेश किया है। इससे 2026 में FPI द्वारा किया गया कुल निवेश 48,550 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
बिकवाली के पीछे क्या हैं बड़ी वजहें?
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारक काम कर रहे हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है। ऊंची ऊर्जा कीमतों से महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास पर इसके नकारात्मक असर की चिंताएं बनी हुई हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी ने भी वैश्विक नकदी की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, "इससे सेकेंडरी मार्केट के सुस्त प्रदर्शन के बावजूद प्राइमरी मार्केट में जारी तेजी की कुछ हद तक वजह समझ में आती है।"
बाज़ार पर असर और भविष्य का नज़रिया
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर पिछले हफ्ते शेयर बाज़ार पर भी दिखा, जब सेंसेक्स 0.65% गिरकर 74,294.46 पर और निफ्टी 0.22% गिरकर 23,346.40 पर बंद हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि आगे FPI के निवेश का रुख ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5% के स्तर पर होना भारतीय इक्विटी बाज़ार के लिए नकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों की बेहतर कमाई की उम्मीदें कुछ सकारात्मक कारक भी हैं जो बाज़ार को सहारा दे सकते हैं।
इनपुट: IANS



