रविवार, 20 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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चीन में AI का बढ़ता प्रभाव: युवाओं के लिए नौकरी का संकट और गहराया

चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल जिस तेज़ी से बढ़ रहा है, उसने देश के युवा कर्मचारियों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग की…

चीन में AI का बढ़ता प्रभाव: युवाओं के लिए नौकरी का संकट और गहराया
(फोटो: IANS)

चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल जिस तेज़ी से बढ़ रहा है, उसने देश के युवा कर्मचारियों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग की अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र में AI को अपनाने की कोशिशों के चलते सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से लेकर डिलीवरी सेवाओं तक, कई नौकरियों पर ख़तरा मंडरा रहा है। यह स्थिति ऐसे समय में और भी गंभीर हो गई है, जब चीन के युवा पहले से ही रोज़गार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

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चीन में 16 से 24 साल के युवाओं (जो पढ़ाई नहीं कर रहे) के बीच बेरोज़गारी दर राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना ज़्यादा है, जबकि शहरी बेरोज़गारी दर करीब 5 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर हो रहे ऑटोमेशन से युवाओं के लिए स्थिर नौकरी पाना और भी मुश्किल हो सकता है।

तकनीकी नौकरियों पर सीधा असर

AI का सबसे ज़्यादा असर तकनीकी क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। बीजिंग के प्रोग्रामर फेई झाओजुन की नौकरी तब चली गई, जब उनकी कंपनी ने कोडिंग के काम के लिए AI की क्षमताओं को परखना शुरू किया। फेई उन 160 कर्मचारियों में से थे जिन्हें छंटनी में निकाला गया। उन्होंने कहा, "एआई की क्षमता लगातार बेहतर हो रही है और कई मिड-लेवल प्रोग्रामिंग की नौकरियां अब आसानी से बदली जा सकती हैं।" नौकरी गंवाने के बाद फेई ने टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री छोड़ दी है और अब शॉर्ट वीडियो बनाने के साथ अपने अगले करियर के बारे में सोच रहे हैं।

कंपनियों में AI अपनाने की होड़

मार्केट इंटेलिजेंस फर्म IDC के आंकड़ों के मुताबिक, चीन में AI अपनाने की रफ़्तार हैरान करने वाली है। जहाँ 2024 में 10 प्रतिशत से भी कम चीनी औद्योगिक कंपनियां AI मॉडल का इस्तेमाल कर रही थीं, वहीं पिछले साल यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो गया। यह दिखाता है कि कंपनियाँ लागत घटाने और काम तेज़ करने के लिए कितनी उत्सुकता से इस तकनीक को अपना रही हैं।

बदलाव और सामाजिक चिंताएं

इस तकनीकी बदलाव का असर आम जन-जीवन पर भी दिखने लगा है। लॉजिस्टिक्स में पार्सल छांटने के लिए ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात किए जा रहे हैं और शहरों में फूड डिलीवरी रोबोट आम होते जा रहे हैं। इससे डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लाखों कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जहाँ AI से उत्पादकता बढ़ेगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी, वहीं अगर नई नौकरियाँ पैदा नहीं हुईं तो बड़े पैमाने पर छंटनी से बेरोज़गारी का दबाव बढ़ सकता है और सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।

इनपुट: IANS

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