विकसित भारत 2047: केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्री वित्तीय रणनीति पर करेंगे मंथन
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय तालमेल को और मजबूत करने के लिए एक अहम बैठक होने जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय…
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय तालमेल को और मजबूत करने के लिए एक अहम बैठक होने जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय शुक्रवार से नई दिल्ली में दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, जिसमें राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री व वित्त सचिव हिस्सा लेंगे।
इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय 'विकसित भारत की यात्रा का वित्तपोषण' रखा गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक का उद्देश्य नीतिगत स्तर पर केंद्र और राज्यों को एक साथ लाना है, ताकि देश की विकास यात्रा से जुड़ी वित्तीय चुनौतियों और प्राथमिकताओं पर गहन चर्चा हो सके। इस मंच पर अकादमिक विशेषज्ञता और व्यावहारिक नीतिगत अनुभव दोनों का संगम देखने को मिलेगा।
सम्मेलन के प्रमुख सत्र और वक्ता
उद्घाटन सत्र में आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) की सचिव अनुराधा ठाकुर सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालेंगी, जिसके बाद 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष रह चुके एन.के. सिंह मुख्य भाषण देंगे। वहीं, महाराष्ट्र सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर श्रीवास्तव इस विषय पर राज्यों का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे।
सम्मेलन को तीन मुख्य विषयगत सत्रों में बांटा गया है, जिनमें व्यापक आर्थिक परिदृश्य, कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए वित्तपोषण और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव के लिए वित्तपोषण शामिल हैं। इसके अलावा, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग विकास के परिणामों को मापने के महत्व पर और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन सुशासन में नई तकनीकों की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे।
चर्चा के मुख्य बिंदु
इस मंथन के लिए प्रतिभागियों को पहले से ही कई महत्वपूर्ण विषयों पर पृष्ठभूमि दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं। इनमें 'विकसित भारत' के लिए आर्थिक रोडमैप, निजी वित्त की भूमिका, राज्यों पर जीएसटी 2.0 का प्रभाव, कृषि बाजारों के लिए वित्तपोषण, नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन कैप्चर जैसी प्रौद्योगिकियों से जुड़े वित्तीय पहलू शामिल हैं। इन चर्चाओं का लक्ष्य देश के विकास के लिए एक ठोस वित्तीय रणनीति तैयार करना है।
इनपुट: IANS



