सोमवार, 6 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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यूरोपीय संघ का नया कस्टम शुल्क: चीन और अमेरिका से आने वाले सस्ते सामान अब होंगे महंगे

चीन जैसे देशों से आने वाले सस्ते आयातित सामानों पर यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक नया शुल्क लगा दिया है, जिससे ऑनलाइन खरीदारी का गणित बदल सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईयू ने 150 यूरो

यूरोपीय संघ का नया कस्टम शुल्क: चीन और अमेरिका से आने वाले सस्ते सामान अब होंगे महंगे
(फोटो: IANS)

चीन जैसे देशों से आने वाले सस्ते आयातित सामानों पर यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक नया शुल्क लगा दिया है, जिससे ऑनलाइन खरीदारी का गणित बदल सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईयू ने 150 यूरो तक की कीमत वाले सामानों पर मिलने वाली कस्टम ड्यूटी छूट को खत्म करते हुए हर डिक्लेरेशन लाइन पर 3 यूरो का एक समान शुल्क लागू कर दिया है। इस कदम का मकसद आयात को संतुलित करना और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।

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यह नया नियम ग्रीस और अन्य यूरोपीय संघ देशों में अगले बुधवार से लागू हो जाएगा। इसका सीधा असर बी2सी (बिजनेस-टू-कंज्यूमर) डिस्टेंस सेल्स के जरिए विदेशों, खासकर चीन और अमेरिका से होने वाली ऑनलाइन शॉपिंग पर पड़ेगा।

खरीदारी पर तत्काल असर

इस फैसले का प्रभाव पहले से ही दिखाई दे रहा है। कई ग्राहकों ने ऑर्डर की कुल लागत में अप्रत्याशित वृद्धि देखकर अपनी खरीदारी रद्द कर दी है। उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक 6 यूरो में तीन अलग-अलग उत्पाद खरीदता है, तो उसे हर उत्पाद पर 3 यूरो के हिसाब से कुल 9 यूरो का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। इससे 6 यूरो का सामान 15 यूरो का हो जाएगा, जो इसे ग्राहकों के लिए काफी कम आकर्षक बनाता है।

नए नियम और उनकी अवधि

ग्रीक सिटी टाइम्स के एक लेख का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि यह विशेष शुल्क अस्थायी है और 1 जुलाई, 2028 तक लागू रहेगा। इसके बाद, सभी ई-कॉमर्स उत्पादों पर उनकी कीमत की परवाह किए बिना मानक टैरिफ दरें लागू होंगी। कस्टम अधिकारी और इकोनॉमिक ऑपरेटर पहले से ही इस नए ढांचे को लागू करने की प्रक्रिया में हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हर पार्सल को एक अलग शिपमेंट माना जाएगा।

भुगतान और पारदर्शिता की प्रक्रिया

शुल्क के सही भुगतान की जिम्मेदारी घोषणाकर्ता (डिक्लेरेंट) की होगी, जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, विक्रेता या कस्टम प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। कूरियर कंपनियां यह राशि अंतिम ग्राहक से वसूल सकती हैं। हालांकि, जिन मामलों में खरीदारी के समय IOSS (इम्पोर्ट वन-स्टॉप शॉप) सिस्टम के जरिए वैट का भुगतान किया जाता है, वहां डिलीवरी के समय कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा, सामान की गलत घोषणा को रोकने के लिए 'प्रोडक्ट आइडेंटिफायर' (पीआईडी) कोड भी पेश किए जा रहे हैं, जिससे कस्टम अधिकारियों को उत्पादों की सटीक जांच और ट्रेसिबिलिटी में मदद मिलेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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