पीएम मोदी का ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड दौरा: हिंद-प्रशांत रणनीति से मुक्त व्यापार तक, संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अगले चरण में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा करेंगे, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक सं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अगले चरण में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा करेंगे, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक संबंधों को एक नया आयाम देना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत दोनों देशों के साथ व्यापार, निवेश और शिक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
यह प्रधानमंत्री मोदी का ऑस्ट्रेलिया का तीसरा दौरा होगा, जहाँ वह 12 साल के अंतराल के बाद मेलबर्न जाएंगे। इससे पहले उन्होंने नवंबर 2014 और मई 2023 में ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की थी। इस दौरे को भू-राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह दो क्वाड साझेदारों के बीच संबंधों को और गहरा करेगा।
ऑस्ट्रेलिया: हिंद-प्रशांत, व्यापार और शिक्षा पर फोकस
इस यात्रा के दौरान हिंद-प्रशांत विजन एक प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों देशों का लक्ष्य छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के लिए नए अवसर पैदा करना है। आपसी संबंधों की परिपक्वता का संकेत देते हुए, ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन एसी तय प्रोटोकॉल से अलग हटकर पीएम मोदी से मिलने मेलबर्न जाएंगी।
आर्थिक मोर्चे पर, प्रधानमंत्री 2026 भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को संबोधित करेंगे, जिससे व्यापार और निवेश को गति मिलने की उम्मीद है। शिक्षा के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया भारत की नई शिक्षा नीति के तहत एक प्रमुख भागीदार बनकर उभरा है। फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी सहित अब तक आठ ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा, पीएम मोदी एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगभग 10 लाख तक पहुंच गई है, जो वहां का सबसे तेजी से बढ़ता डायस्पोरा समुदाय है।
न्यूजीलैंड: 40 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा
पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी। यह दौरा हाल ही में हुए भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद हो रहा है, जो व्यापारिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। न्यूजीलैंड अपनी आर्थिक साझेदारी में विविधता लाना चाहता है ताकि किसी एक बाजार पर उसकी निर्भरता कम हो सके।
फिलहाल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है, जिसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य है। मुक्त व्यापार समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का प्रावधान है। न्यूजीलैंड डेयरी, कृषि और हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है, और भारत इन क्षेत्रों में नवाचार से सीखने के लिए साझेदारी का इच्छुक है। इसके तहत न्यूजीलैंड नागालैंड और उत्तराखंड में कीवी फ्रूट के लिए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित कर रहा है।
इनपुट: IANS



