कर्नाटक: ब्रांडेड एंटीबायोटिक के नाम पर बिक रहा था नकली दवाओं का ज़हर, ED की 5 ठिकानों पर छापेमारी
कर्नाटक में नकली दवाओं के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ सस्ती जेनेरिक दवाओं को फाइज़र जैसी बड़ी कंपनियों के महंगे एंटीबायोटिक के लेबल लगाकर बेचा जा रहा था। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय…
कर्नाटक में नकली दवाओं के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ सस्ती जेनेरिक दवाओं को फाइज़र जैसी बड़ी कंपनियों के महंगे एंटीबायोटिक के लेबल लगाकर बेचा जा रहा था। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए पांच ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण ज़ब्त किए गए और एक बैंक खाता भी फ्रीज़ किया गया है।
ईडी की यह कार्रवाई बेंगलुरु दक्षिण के तवारेकेरे पुलिस थाने में 18 अगस्त, 2026 को दर्ज एक FIR के बाद शुरू हुई। इससे पहले, औषधि नियंत्रण प्राधिकरण और पुलिस ने एक संयुक्त छापे में पाया था कि बिना किसी वैध लाइसेंस के दवाओं को स्टोर किया जा रहा था और उनके लेबल बदले जा रहे थे। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू की।
कैसे काम करता था यह रैकेट?
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का मुख्य आरोपी आर. प्रशांत था, जिसने बिदादी के पास एक फार्महाउस किराए पर ले रखा था। इसी फार्महाउस में दवाओं की अवैध रीपैकेजिंग और रीलेबलिंग का काम होता था। एजेंसी के मुताबिक, गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों से बड़ी मात्रा में सस्ती दवाएं खरीदते थे।
इसके बाद, इन सस्ती दवाओं को नई शीशियों (वायल) में भरकर उन पर फाइज़र के महंगे एंटीबायोटिक उत्पादों, जैसे जाविसेफ्टा और एम्ब्लावियो के नकली लेबल चिपका दिए जाते थे। इस तरह, आम जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड और महंगी दवाइयों के रूप में बाज़ार में भेजी जाती थीं।
अस्पतालों तक ऐसे पहुँचती थीं नकली दवाएं
एजेंसी ने बताया कि इन नकली दवाओं का वितरण पहले डीएम फार्मास्यूटिकल्स के माध्यम से किया जाता था, जो इन्हें कृपा हेल्थकेयर नामक एक अन्य फर्म को सप्लाई करती थी। कृपा हेल्थकेयर इन नकली दवाओं को असली दवाओं के स्टॉक में मिलाकर आगे अन्य दवा कंपनियों और अस्पतालों को बेच देती थी, ताकि किसी को भी इस धोखाधड़ी का शक न हो।
छापेमारी के दौरान ईडी ने वीरेश कुमार नाम के एक व्यक्ति का बैंक खाता फ्रीज कर दिया, जिसमें करीब 9 लाख रुपये जमा थे। अधिकारियों का कहना है कि मामले की आगे की जांच जारी है ताकि इस नेटवर्क में शामिल सभी लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
इनपुट: IANS



