मंगलवार, 3 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
अपराध

फर्ज़ी सॉफ्टवेयर आयात की आड़ में ₹1500 करोड़ का घोटाला? ED की दिल्ली-कोलकाता में छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले का खुलासा किया है, जिसमें सॉफ्टवेयर आयात के बहाने अवैध रूप से विदेशों में धन भेजा जा रहा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले…

फर्ज़ी सॉफ्टवेयर आयात की आड़ में ₹1500 करोड़ का घोटाला? ED की दिल्ली-कोलकाता में छापेमारी
(फोटो: IANS)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले का खुलासा किया है, जिसमें सॉफ्टवेयर आयात के बहाने अवैध रूप से विदेशों में धन भेजा जा रहा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अपराध से जुड़ी अनुमानित राशि करीब 1,500 करोड़ रुपये है। इसी सिलसिले में एजेंसी ने दिल्ली और कोलकाता के सात ठिकानों पर छापेमारी कर 47 लाख रुपये नकद और बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जब्त की है।

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ईडी के विशाखापत्तनम सब-ज़ोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की है। छापेमारी के दौरान 47 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी के अलावा 5,900 अमेरिकी डॉलर, 2,200 यूएई दिरहम और 5,600 चीनी युआन भी बरामद हुए। साथ ही, कई आपत्तिजनक दस्तावेज़, संपत्ति के कागज़ात और डिजिटल उपकरण भी ज़ब्त किए गए हैं, जिनसे अवैध लेन-देन के सबूत मिले हैं।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क?

ईडी की जांच आयकर विभाग की एक शिकायत पर विशाखापत्तनम के एमवीपी पुलिस थाने में दर्ज FIR से शुरू हुई। आरोप है कि मुख्य आरोपी वड्डी महेश और अन्य लोगों ने फर्ज़ी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर विभिन्न बैंकों के ज़रिए विदेशों में पैसा भेजा। जांच में पता चला कि वड्डी महेश ने अपने पिता और सहयोगियों के साथ मिलकर कोलकाता में कई शेल (मुखौटा) कंपनियाँ बनाईं और उनके बैंक खाते खोले।

इन खातों का इस्तेमाल कस्टमाइज़्ड सॉफ्टवेयर खरीदने के नाम पर सिंगापुर, हांगकांग और चीन की पाँच कंपनियों को 569.03 करोड़ रुपये भेजने के लिए किया गया। हालांकि, बैंकों को जो विदेशी चालान दिए गए, वे फर्ज़ी थे और बदले में कोई सॉफ्टवेयर आयात नहीं किया गया।

तस्करी और हवाला का गठजोड़

जांच में भीमेंद्र कुमार गोयल का नाम भी सामने आया है, जिन्हें पहले भी तीन बार COFEPOSA के तहत हिरासत में लिया जा चुका है। आरोप है कि वह सीमा शुल्क चुकाए बिना कॉस्मेटिक, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कपड़ों की तस्करी करते थे। IANS के हवाले से बताया गया है कि तस्करी से कमाए गए पैसे को वैध दिखाने के लिए उन्होंने वड्डी महेश से संपर्क किया था।

ईडी के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच वड्डी महेश ने अपनी शेल कंपनियों के खातों में पैसा प्राप्त किया और भीमेंद्र कुमार गोयल के निर्देश पर इसे विदेश भेज दिया। यह पैसा सिंगापुर और हांगकांग की निष्क्रिय कंपनियों में जमा होता था, जहाँ से इसे अंततः गोयल और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों के खातों में भेजकर वैध दिखाया जाता था। जांच में पवन कुमार रल्ली और आशीष टोडी जैसे अन्य लोगों की संलिप्तता भी पाई गई है। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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