मंगलवार, 3 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक: 38,000 करोड़ के बकाये से परेशान ठेकेदारों ने सीएम से लगाई गुहार, तत्काल भुगतान की मांग

कर्नाटक में लगभग 1.5 लाख ठेकेदार और उनके परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, क्योंकि सरकारी विभागों पर उनका करीब 38,000 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…

कर्नाटक: 38,000 करोड़ के बकाये से परेशान ठेकेदारों ने सीएम से लगाई गुहार, तत्काल भुगतान की मांग
(फोटो: IANS)

कर्नाटक में लगभग 1.5 लाख ठेकेदार और उनके परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, क्योंकि सरकारी विभागों पर उनका करीब 38,000 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात कर इस बकाये को तत्काल जारी करने की मांग की है।

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ठेकेदारों का कहना है कि यह भुगतान साल 2021-22 से लंबित है, जिससे उनकी माली हालत बिगड़ती जा रही है। सोमवार को मुख्यमंत्री को सौंपे एक ज्ञापन में संघ ने याद दिलाया कि सरकार ने पहले दो महीने के भीतर सभी लंबित बिलों का भुगतान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इस वादे पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

भुगतान और टेंडर प्रक्रिया को लेकर प्रमुख मांगें

ठेकेदार संघ ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि नए विकास कार्यों को शुरू करने से पहले पुराने कामों का सारा बकाया चुकाया जाए। संघ ने यह भी आग्रह किया है कि बिना बजटीय प्रावधान वाले नए कामों के लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी जाए।

इसके अलावा, संघ ने कई अन्य सुधारों की भी मांग की है, जिनमें शामिल हैं:

  • पैकेज टेंडर प्रणाली को खत्म करना।
  • निविदा प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप पर रोक।
  • कार्य अनुभव और टर्नओवर की पात्रता अवधि को बढ़ाकर 10 साल करना।

अन्य वित्तीय और प्रक्रियात्मक चिंताएं

ज्ञापन में कुछ अन्य विशिष्ट मुद्दों पर भी मुख्यमंत्री का ध्यान खींचा गया है। ठेकेदारों ने साल 2017-18 और 2018-19 के लिए 8 प्रतिशत वैट-जीएसटी अंतर राशि जारी करने की मांग की है। साथ ही, भुगतान के लिए अनिवार्य किए गए 'कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट मॉड्यूल' की शर्त को भी वापस लेने का आग्रह किया है। संघ ने जल जीवन मिशन परियोजनाओं के भुगतान में देरी और ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण द्वारा रोके गए भुगतानों पर भी अपनी चिंता व्यक्त की है।

संघ ने कर्नाटक वन विभाग की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि हजारों करोड़ रुपये के काम बिना तय प्रक्रिया का पालन किए धारा 13(बी) के तहत आवंटित कर दिए गए हैं। ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे इन सभी मुद्दों पर संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों की एक बैठक बुलाकर जल्द से जल्द समाधान निकालें।

इनपुट: IANS

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