बिहार: दो निर्दलीय MLC के BJP में शामिल होने पर विवाद, दलबदल कानून के तहत सदस्यता रद्द करने की मांग
बिहार विधान परिषद के दो निर्दलीय सदस्यों की सदस्यता को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी ने दलबदल विरोधी कानून के तहत दोनों की सदस्यता तत्काल रद्द…
बिहार विधान परिषद के दो निर्दलीय सदस्यों की सदस्यता को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी ने दलबदल विरोधी कानून के तहत दोनों की सदस्यता तत्काल रद्द करने की मांग की है। यह पूरा मामला तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीते बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित राहुल राज से जुड़ा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दोनों सदस्य हालिया विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते थे, लेकिन बाद में कथित तौर पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसी कदम को आधार बनाकर उनकी योग्यता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई की मांग
सोमवार को पूर्व MLC प्रोफेसर रामबली सिंह चंद्रवंशी के नेतृत्व में जन सुराज पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से मुलाकात की। उन्होंने सभापति को एक औपचारिक याचिका के साथ संबंधित दस्तावेजी सबूत भी सौंपे। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के 72 घंटों के भीतर ही दोनों MLC भाजपा कार्यालय पहुंचे और औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हो गए।
चंद्रवंशी ने मीडिया को बताया कि दोनों नेताओं को पार्टी की सदस्यता रसीदें दी गईं और उन्होंने भाजपा का अंगवस्त्र भी पहना था। उन्होंने दावा किया, "जन सुराज के प्रतिनिधिमंडल ने सदस्यता रसीदों के नंबर सहित सभी दस्तावेजी साक्ष्य विधान परिषद सभापति को सौंप दिए हैं और अब इस मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।"
कानून और आरोप-प्रत्यारोप
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "यह पूरी तरह स्पष्ट है कि कोई भी निर्दलीय एमएलसी चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो सकता। यदि वह ऐसा करता है तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। दोनों सदस्यों की सदस्यता तुरंत रद्द की जानी चाहिए, अन्यथा संविधान को फाड़कर फेंक देने जैसा होगा।"
वहीं, जन सुराज पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि जब कानूनी कार्रवाई की संभावना सामने आई, तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सोशल मीडिया से संबंधित पोस्ट हटा दिए। इसके बाद यह दावा किया गया कि दोनों MLC केवल भाजपा को समर्थन देने के लिए पार्टी कार्यालय गए थे।
क्या कहता है कानून?
पूर्व MLC चंद्रवंशी ने अपने अनुभव का हवाला देते हुए बताया कि उन्हें भी तीन साल पहले इसी विधान परिषद में दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था। उन्होंने कहा, "पार्टी के टिकट पर चुने गए सदस्यों के मामलों में कुछ व्याख्या की गुंजाइश हो सकती है, लेकिन 52वें संविधान संशोधन के तहत निर्दलीय सदस्यों के मामले में कानून बिल्कुल स्पष्ट है। यदि कोई निर्दलीय सदस्य चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसकी सदस्यता तत्काल समाप्त की जा सकती है।" अब इस मामले में अंतिम फैसला सभापति को करना है।
इनपुट: IANS



