RCom केस: ED ने ₹40,000 करोड़ से ज्यादा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दाखिल की सप्लीमेंट्री चार्जशीट
अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, जांच एजेंसी ने शनिवार को इस…
अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, जांच एजेंसी ने शनिवार को इस मामले में एक पूरक शिकायत (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दाखिल की है, जिसमें केस से जुड़ी कई नई और अहम जानकारियाँ शामिल हैं।
यह मामला बैंकों और वित्तीय संस्थानों के एक कंसोर्टियम से लिए गए 40,185.55 करोड़ रुपए के लोन की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। ED का आरोप है कि RCom और उसकी सहयोगी कंपनियों ने इस भारी-भरकम रकम का भुगतान नहीं किया और फंड को अवैध तरीके से दूसरी जगहों पर इस्तेमाल किया।
क्या हैं ED के मुख्य आरोप?
ED ने अपनी जांच में पाया कि बैंकों से मिले फंड का इस्तेमाल उस काम के लिए नहीं किया गया जिसके लिए उसे लिया गया था। इसके बजाय, नए लोन का उपयोग पुरानी घरेलू और विदेशी देनदारियों को चुकाने, फंड को घुमाने और 'एवरग्रीन' (लोन को लगातार रिन्यू करना) करने के लिए किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, यह धोखाधड़ी की योजना 2007 में ही शुरू हो गई थी।
एजेंसी ने अपने बयान में कहा है, "अपराध से हासिल रकम का मूल्य 40,185.55 करोड़ रुपए लगाया गया है। यह वह कुल बकाया रकम है जिसका भुगतान उधार लेने वाली कंपनियों ने कंसोर्टियम बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डहोल्डर्स को नहीं किया है।"
कैसे हुआ फंड का डायवर्जन?
जांच से पता चला कि फंड को समूह की अन्य कंपनियों, जैसे रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड में डायवर्ट किया गया। ED ने यह भी पाया कि 1 अरब डॉलर के फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (FCCB) से मिली रकम के अंतिम इस्तेमाल के बारे में गलत सर्टिफिकेशन दिया गया। आरोप है कि लोन की रकम का इस्तेमाल प्रमोटरों के लिए विदेश में निजी संपत्ति खरीदने और RCom के मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए भी किया गया।
मामले में अब तक की कार्रवाई
यह पूरक शिकायत 27 मार्च को दायर पहली अभियोजन शिकायत के बाद की गई है। ED ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL), गौतम भाईलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को PMLA, 2002 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपी बनाया है।
इस मामले में गौतम दोषी को 12 जून और सतीश सेठ को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था, और दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी ने दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे स्थित 8,078.06 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने की भी मांग की है। मामले में आगे की जांच अभी जारी है।
इनपुट: IANS



