रविवार, 9 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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रिलायंस इंफ्रा पर 187 करोड़ की हेराफेरी का आरोप, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केस दर्ज किया

अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (RIL) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 187 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक विशेष अदालत में मुकदमा दर्ज कराया है। समाचार…

रिलायंस इंफ्रा पर 187 करोड़ की हेराफेरी का आरोप, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केस दर्ज किया
(फोटो: IANS)

अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (RIL) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 187 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक विशेष अदालत में मुकदमा दर्ज कराया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कंपनी पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के चार हाईवे प्रोजेक्ट्स से मिले फंड को दूसरी जगह लगाने का आरोप है।

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ईडी ने शनिवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह शिकायत दर्ज की। इसमें रिलायंस इंफ्रा के अलावा सतीश सेठ और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिन पर पीएमएलए की धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध करने का आरोप है। इस मामले में सतीश सेठ को 12 जून को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

क्या है पूरा मामला?

जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला NHAI के चार टोल-रोड प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है, जिनमें त्रिची-करूर (NH-67), त्रिची-डिंडीगुल (NH-45), सलेम-उलुंदुरपेट (NH-68) और जयपुर-रींगस (NH-11) शामिल हैं। ईडी ने अपनी जांच में पाया कि इन परियोजनाओं के लिए मिले सरकारी अनुदान और बैंक लोन को एक सुनियोजित साजिश के तहत डायवर्ट किया गया।

आरोप है कि सितंबर-अक्टूबर 2010 के दौरान, फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग के नाम पर लगभग 187 करोड़ रुपये का गबन किया गया। इसके लिए जाली या पिछली तारीखों के समझौते तैयार किए गए थे।

कैसे की गई फंड की हेराफेरी?

ईडी के बयान के अनुसार, पैसा रिलायंस इंफ्रा या उसके स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPV) से पहले निर्माण ठेकेदारों को भेजा गया। वहां से यह रकम ऐसी शेल कंपनियों तक पहुंचाई गई, जिनका सड़क निर्माण से कोई संबंध नहीं था। जांच में सामने आया कि बाद में इन ट्रांजैक्शन को असली प्रोजेक्ट खर्च दिखाने के लिए दस्तावेज तैयार किए गए, जबकि असल में फंड को शेल कंपनियों और हीरा व्यापारियों के जरिए घुमाया गया था।

एजेंसी ने इस मामले की जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा 11 फरवरी, 2026 को दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू की थी। यह FIR फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके बनाई गई शेल कंपनियों से संबंधित थी, जिनका इस्तेमाल फंड ट्रांसफर और बाहरी रेमिटेंस के लिए हो रहा था।

ईडी की अब तक की कार्रवाई

इस केस में ईडी ने 3 अगस्त को 187 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। जब्त की गई संपत्ति में रिलायंस इंफ्रा के पास मौजूद अचल संपत्ति, रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और मेसर्स क्षीराब्द कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड के पास मौजूद जमीन शामिल है। ईडी ने कहा है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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