कोच्चि में भारत और अमेरिका की नौसेनाएं समुद्री विस्फोटकों को नाकाम करने का अभ्यास करेंगी
भारत और अमेरिका की नौसेनाएं अपने रक्षा सहयोग को और मजबूती देते हुए एक महत्वपूर्ण संयुक्त अभ्यास करने जा रही हैं। यह पांच दिवसीय अभ्यास केरल के कोच्चि में स्थित नौसेना की दक्षिणी कमान में 10 से 14…
भारत और अमेरिका की नौसेनाएं अपने रक्षा सहयोग को और मजबूती देते हुए एक महत्वपूर्ण संयुक्त अभ्यास करने जा रही हैं। यह पांच दिवसीय अभ्यास केरल के कोच्चि में स्थित नौसेना की दक्षिणी कमान में 10 से 14 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य समुद्र के भीतर छिपे विस्फोटक खतरों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित रूप से निष्क्रिय करना है।
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को ‘एक्सप्लोसिव ऑर्डेनेंस डिस्पोजल’ (EOD) अभ्यास कहा जाता है। इसमें दोनों देशों के विशेषज्ञ गोताखोर और विस्फोटक आयुध निष्क्रिय करने वाले दल हिस्सा लेंगे। वे एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव, तकनीक और कार्यप्रणाली साझा करेंगे ताकि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में मिलकर प्रभावी ढंग से कार्रवाई की जा सके।
अभ्यास का स्वरूप और उद्देश्य
इस अभ्यास के दौरान सिर्फ सैद्धांतिक चर्चा ही नहीं होगी, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों जैसे हालात बनाकर व्यावहारिक अभ्यास भी किए जाएंगे। इसमें उपकरणों का प्रदर्शन और चुनौतीपूर्ण मिशनों का संयुक्त संचालन शामिल होगा। नौसेना के मुताबिक, अभ्यास का मकसद यह समझना है कि किसी समुद्री क्षेत्र में संदिग्ध विस्फोटक मिलने पर दोनों नौसेनाएं कैसे तेजी से और सुरक्षित तरीके से निपट सकती हैं।
इसके अलावा, विशेषज्ञ विस्फोटक निष्क्रिय करने की आधुनिक तकनीकों, नई प्रौद्योगिकियों और दुनिया भर में अपनाई जा रही सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर भी जानकारी साझा करेंगे।
लंबी साझेदारी की एक और कड़ी
यह कोई पहली बार नहीं है जब दोनों देशों की नौसेनाएं इस तरह का अभ्यास कर रही हैं। भारत और अमेरिका साल 2005 से ही संयुक्त बचाव और विस्फोटक निष्क्रिय करने के अभ्यास करते आ रहे हैं, और इस साल का आयोजन इस द्विपक्षीय प्रशिक्षण श्रृंखला का आठवां संस्करण है।
यह अभ्यास न केवल प्रशिक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे दोनों देशों के विशेषज्ञों के बीच आपसी भरोसा, तालमेल और एक साथ काम करने की क्षमता भी मजबूत होती है। कोच्चि में होने वाला यह आयोजन दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और विशेष समुद्री अभियानों में बढ़ती साझेदारी का एक और प्रमाण है।
इनपुट: IANS



