कोलकाता: रियल एस्टेट निदेशक अमित गांगुली मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की गिरफ्त में
पश्चिम बंगाल में संपत्तियों की धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोलकाता स्थित रियल…
पश्चिम बंगाल में संपत्तियों की धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोलकाता स्थित रियल एस्टेट कंपनी 'गांगुली होम सर्च प्राइवेट लिमिटेड' के निदेशक अमित गांगुली को गिरफ्तार कर लिया है। गांगुली को 15 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया और विशेष अदालत ने उन्हें चार दिन की ED हिरासत में भेज दिया है।
यह मामला कई व्यक्तियों और संस्थाओं से जुड़ी अचल संपत्तियों के अवैध अधिग्रहण, नियंत्रण और हस्तांतरण से संबंधित है। ED ने अपनी जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIR के आधार पर शुरू की थी।
जाली दस्तावेज़ों से संपत्ति पर कब्जा
जांचकर्ताओं का आरोप है कि अमित गांगुली ने अपने सहयोगियों और विभिन्न कंपनियों के माध्यम से धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे कपटपूर्ण तरीकों का इस्तेमाल कर मूल्यवान संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा किया। ED की जांच में यह बात सामने आई है कि संपत्तियों पर झूठा मालिकाना हक जताने के लिए जाली बिक्री विलेख, समझौते, पावर ऑफ अटॉर्नी, उपहार विलेख और बोर्ड प्रस्ताव जैसे मनगढ़ंत दस्तावेज़ तैयार किए गए।
एजेंसी ने यह भी बताया कि असली मालिकों के अधिकारों में हस्तक्षेप करने के लिए भूमि और नगरपालिका के रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया था।
क्या है धोखाधड़ी का तरीका?
ED के मुताबिक, गांगुली भूस्वामियों के साथ संयुक्त उद्यम (Joint Venture) के ज़रिए संपत्तियों पर विकास के अधिकार हासिल कर लेते थे। हालांकि, वे मालिकों को उनके कानूनी हक देने के बजाय, जाली दस्तावेज़ बनाकर उन संपत्तियों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लेते थे। इस तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों से अर्जित आय और संपत्ति के अधिकार को PMLA के तहत 'अपराध की आय' माना जाता है।
एजेंसी ने दावा किया है कि अमित गांगुली का नाम लगभग 23 FIR में शामिल है और उन्होंने इसी कार्यप्रणाली का उपयोग करके कई निवेशकों और ज़मीन मालिकों के साथ धोखा किया है। इससे पहले, 28 मार्च, 2026 को ED ने गांगुली के ठिकानों पर तलाशी ली थी, जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और अन्य रिकॉर्ड ज़ब्त किए गए थे। ज़ब्त सामग्री से यह भी संकेत मिला कि रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े मामलों में स्थानीय अधिकारियों पर उनका कथित प्रभाव था। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



