शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर संकट: चुनाव आयोग 12 सितंबर को दोनों गुटों की सुनेगा

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर चल रहे विवाद में अब सबकी निगाहें 12 सितंबर पर टिक गई हैं। इस दिन भारत का चुनाव आयोग पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों से अलग-अलग मुलाकात करेगा। समाचार…

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर संकट: चुनाव आयोग 12 सितंबर को दोनों गुटों की सुनेगा
(फोटो: IANS)

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर चल रहे विवाद में अब सबकी निगाहें 12 सितंबर पर टिक गई हैं। इस दिन भारत का चुनाव आयोग पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों से अलग-अलग मुलाकात करेगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में पार्टी के भविष्य को लेकर अहम फैसला होने की उम्मीद है, खासकर पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों से पहले।

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यह बैठक नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में होगी। आयोग ने पहले बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 12 सितंबर को सुबह 11 बजे का समय दिया था। अब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को भी उसी दिन दोपहर 12 बजे मुलाकात के लिए बुलाया गया है।

बैठक का एजेंडा और प्रक्रिया

हालांकि चुनाव आयोग ने दोनों खेमों को भेजे गए अपने पत्र में बैठक के एजेंडे का खुलासा नहीं किया है, लेकिन आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चर्चा का मुख्य केंद्र पार्टी के नाम और उसके चुनाव चिह्न पर दोनों पक्षों के दावे होंगे। आयोग के सचिव अश्विनी कुमार मोहल ने दोनों गुटों से अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम और वाहनों की जानकारी देने को कहा है, जिसमें अधिकतम पांच सदस्य हो सकते हैं। यह कदम ऋतब्रत बनर्जी गुट द्वारा मुलाकात के लिए समय मांगने के बाद उठाया गया है।

उपचुनाव से पहले फैसले की उम्मीद

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 16 सितंबर से पहले कोई निर्णय ले सकता है। यह तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की यह अंतिम तिथि है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनावों को देखते हुए आयोग के पास दो मुख्य विकल्प हैं। पहला, वह तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक चुनाव चिह्न किसी एक गुट को आवंटित कर दे। दूसरा विकल्प यह है कि अंतिम फैसला आने तक चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से रोक दिया जाए, जिससे कोई भी गुट इसका इस्तेमाल न कर सके। 12 सितंबर की यह बैठक इस विवाद की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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