शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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महाराष्ट्र मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ी: सवा करोड़ से ज़्यादा वोटरों के रिकॉर्ड में खामियां, चुनाव आयोग भेजेगा नोटिस

महाराष्ट्र में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चलाए गए चुनाव आयोग के एक विशेष अभियान में सवा करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं के रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट…

महाराष्ट्र मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ी: सवा करोड़ से ज़्यादा वोटरों के रिकॉर्ड में खामियां, चुनाव आयोग भेजेगा नोटिस
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चलाए गए चुनाव आयोग के एक विशेष अभियान में सवा करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं के रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान पाया गया कि राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल 1.22 करोड़ से अधिक लोगों के गणना प्रपत्रों (एन्यूमरेशन फॉर्म) में डेटा से जुड़ी या तकनीकी खामियां हैं।

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इन गड़बड़ियों के सामने आने के बाद चुनाव अधिकारियों ने इन सभी प्रभावित मतदाताओं को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नोटिस मिलने पर इन लोगों को अपनी मतदाता पहचान साबित करने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने होंगे, जिसके बाद ही उनके रिकॉर्ड को अंतिम रूप दिया जाएगा।

क्या हैं ये गड़बड़ियां?

ड्राफ्ट सूची में शामिल 7.71 करोड़ मतदाताओं में से 1,22,24,000 लोगों के रिकॉर्ड में तकनीकी खामियां पाई गईं। इनमें से 62,48,281 मामलों में मतदाताओं के रिश्तेदारों से जुड़ी जानकारी में विसंगतियां थीं, जबकि 59,75,626 मामलों में रिश्तेदारों की जानकारी को सही ढंग से मैप नहीं किया गया था।

यह समस्या मलाड, धारावी, पनवेल, खड़कवासला, चिंचवड़, हडपसर, सोलापुर दक्षिण और नागपुर के कई इलाकों जैसे प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में ज़्यादा गंभीर है, जहाँ हर क्षेत्र में एक लाख से ज़्यादा डेटा विसंगतियां मिलीं।

अभियान के बाद कितनी बदली सूची?

एसआईआर अभियान शुरू होने से पहले महाराष्ट्र में कुल 9,78,54,049 पंजीकृत मतदाता थे। फील्ड वेरिफिकेशन के बाद 31 अगस्त को जारी की गई ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 7,71,65,562 रह गई है, जो मूल संख्या का 78.86% है।

इसका मतलब है कि लगभग 2.06 करोड़ मतदाता (21.14%) ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं। नाम हटाने के मुख्य कारणों में करीब 34 लाख मृत मतदाताओं और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में 17 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियों को खत्म करना शामिल है।

आपत्तियों पर चुनाव आयोग का सख्त रुख

चुनाव आयोग ने किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए की जाने वाली आपत्तियों पर भी कड़े नियम लागू किए हैं। अब कोई भी आपत्ति केवल उसी विधानसभा क्षेत्र में रहने वाला पंजीकृत मतदाता ही दर्ज करा सकता है, और उसे अपनी आपत्ति के समर्थन में ठोस सबूत भी देने होंगे।

इसके अलावा, जिस मतदाता के खिलाफ आपत्ति की गई है, उसे भी सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का पूरा मौका दिया जाएगा। यह कदम झारखंड जैसे राज्यों से मिले अनुभवों के बाद उठाया गया है, जहां कुछ खास समुदायों के नाम हटवाने के लिए संगठित रूप से आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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