गणेशोत्सव 2023: महाराष्ट्र के पेन से विदेशों तक धूम, 70 लाख से ज़्यादा मूर्तियां बिकीं
महाराष्ट्र का रायगढ़ जिला इस साल गणेशोत्सव से पहले मूर्ति कारोबार का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। जिले के पेन शहर में इस साल गणेश मूर्तियों की बिक्री ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। समाचार एजेंसी…
महाराष्ट्र का रायगढ़ जिला इस साल गणेशोत्सव से पहले मूर्ति कारोबार का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। जिले के पेन शहर में इस साल गणेश मूर्तियों की बिक्री ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, कच्चे माल की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद मूर्तियों की मांग में कोई कमी नहीं आई है।
पेन में अब तक 70 लाख से ज़्यादा गणेश प्रतिमाएं बिक चुकी हैं, जो इस व्यवसाय के लिए एक नया कीर्तिमान है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों में भी यहां की मूर्तियों की भारी मांग है। आंकड़ों के अनुसार, कुल बिक्री में से लगभग 15 से 20 लाख मूर्तियां अमेरिका, दुबई और वेस्टइंडीज जैसे देशों को निर्यात की गई हैं।
पेन: मूर्तिकला का सदियों पुराना गढ़
पेन को गणपति मूर्तियों का गढ़ माना जाता है, जहां यह व्यवसाय सैकड़ों साल पुराना है। यहां 500 से ज़्यादा कारखाने हैं, जिनमें हजारों कारीगर साल भर मूर्तियां बनाने में जुटे रहते हैं। एक स्थानीय विक्रेता ने एजेंसी को बताया कि विदेशों के लिए निर्यात का काम जनवरी में शुरू होकर जून तक चलता है, जिसके बाद घरेलू बाजार की मांगों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
इस साल क्या रहा खास?
इस वर्ष कपड़ों से बनी और डायमंड वर्क वाली गणेश प्रतिमाएं लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। विक्रेताओं के अनुसार, इन विशेष मूर्तियों की मांग विदेशों में सबसे ज़्यादा है और खरीदार इनके लिए अच्छी कीमत चुकाने को भी तैयार रहते हैं। मूर्तियों पर कपड़े और स्टोन का काम मुख्य रूप से महिला कारीगरों द्वारा किया जाता है। मांग इतनी ज़्यादा है कि एक विक्रेता के मुताबिक, उनका 90% स्टॉक पहले ही बिक चुका है।
देश के अन्य हिस्सों में भी तैयारी
पेन के अलावा, महाराष्ट्र के नंदुरबार में भी एक लाख से ज़्यादा गणेश प्रतिमाएं बिक्री के लिए तैयार हैं। वहीं, गुजरात के साबरकांठा जिले के कुकड़िया गांव में एक सराहनीय पहल देखने को मिल रही है। यहां ग्रामीण महिलाएं प्राकृतिक मिट्टी और रंगों का उपयोग करके पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) गणेश मूर्तियां बना रही हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता भी मिल रही है।
इनपुट: IANS



