जमीन कब्जा मामला: अभिषेक बनर्जी के सहयोगी सुमित रॉय ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय ने अपने खिलाफ चल रहे जमीन कब्जा मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कलकत्ता हाईकोर्ट से…
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय ने अपने खिलाफ चल रहे जमीन कब्जा मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कलकत्ता हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद रॉय ने शीर्ष अदालत से अंतरिम सुरक्षा की मांग की है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला पश्चिम मिदनापुर के सालबोनी में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा है। आरोप है कि सुमित रॉय ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी जमीन पर कब्जा किया और फिर उसे बेच दिया। इस शिकायत पर जब पुलिस ने जांच शुरू की तो रॉय अपने किसी भी पते पर नहीं मिले, जिसके बाद पश्चिम मिदनापुर की एक जिला अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
इससे पहले रॉय ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी, जिसे 3 अगस्त को जस्टिस तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने खारिज कर दिया। हालांकि, उसी दिन अदालत ने 'सरकारी नौकरी के बदले पैसे' से जुड़े एक दूसरे मामले में रॉय को कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी थी। इस शर्त में 10 दिनों के भीतर जांच एजेंसी के सामने पेश होना शामिल था।
दो मामलों के बीच गिरफ्तारी की आशंका
सुमित रॉय को आशंका है कि अगर वह नौकरी वाले मामले में जांच के लिए पेश होते हैं, तो पुलिस उन्हें जमीन कब्जाने वाले केस में गिरफ्तार कर लेगी। इसी डर से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उनकी दलील है कि वह जांच में सहयोग करने को तैयार हैं और जब भी एजेंसी बुलाएगी, वह पेश होंगे, लेकिन उससे पहले उन्हें गिरफ्तारी से राहत दी जाए।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल पुलिस की CID ने जून महीने में ही सुमित रॉय के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। 13 जून को पुलिस केंद्रीय बलों के साथ दक्षिण कोलकाता में अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित घर भी पहुंची थी, क्योंकि रॉय के मोबाइल की आखिरी लोकेशन वहीं मिली थी। हालांकि, तलाशी के बाद भी वह वहां नहीं मिले थे।
इनपुट: IANS



