अमित शाह का दावा: नए आपराधिक कानून पीड़ित-केंद्रित और पारदर्शी, पश्चिम बंगाल सरकार पर उठाए सवाल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता में कहा कि तीन नए आपराधिक कानून देश की न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीक-आधारित और समयबद्ध बनाने के लिए लाए गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के…
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता में कहा कि तीन नए आपराधिक कानून देश की न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीक-आधारित और समयबद्ध बनाने के लिए लाए गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये कानून पुराने औपनिवेशिक सिस्टम की तरह केवल सज़ा देने पर केंद्रित नहीं हैं, बल्कि पीड़ितों के हितों को प्राथमिकता देते हैं।
शाह, भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) पर आधारित एक प्रदर्शनी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “इन तीन नए कानूनों का उद्देश्य नागरिकों, संपत्ति और पीड़ितों की सुरक्षा को मजबूत करना है, साथ ही आपराधिक न्याय प्रक्रिया को तेज करना भी है।” उन्होंने जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जैसे प्रावधानों को इसका आधार बताया।
कानून और तकनीक का मेल
गृह मंत्री ने जांच प्रक्रिया में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “हम नई न्याय संहिता में तकनीक के बढ़ते उपयोग पर जोर दे रहे हैं, ताकि पुलिस अपनी जांच में अधिक तकनीक आधारित साक्ष्य जुटा सके। इससे मुकदमों की सुनवाई की प्रक्रिया तेज होगी।” उनके अनुसार, फोरेंसिक साक्ष्य और ऑनलाइन न्यायिक कार्यवाही जैसे सुधार कानूनों को अधिक पीड़ित-केंद्रित बनाते हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार पर आरोप
इस अवसर पर अमित शाह ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में इन कानूनों को लागू करने की अधिसूचना जानबूझकर देर से जारी की गई। शाह ने कहा, “यह अधिसूचना जानबूझकर इसलिए जारी नहीं की गई क्योंकि डर था कि नए कानून लागू होते ही पिछली सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा खड़े किए गए भ्रष्टाचार के किले कुछ ही मिनटों में ढह जाएंगे।”
उन्होंने अपनी सरकार के एजेंडे को स्पष्ट करते हुए कहा, “बंगाल चुनाव में हमने लोगों से डर नहीं, बल्कि विश्वास की सरकार देने का वादा किया था। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने जिस पहली फाइल पर हस्ताक्षर किए, वह हमारे तीन नए न्याय संहिताओं को लागू करने और ब्रिटिश काल के पुराने कानूनों को हटाने से संबंधित थी। वहीं से डर की जगह विश्वास कायम करने का काम शुरू हुआ।” शाह ने यह भी दावा किया कि तृणमूल सरकार के दौरान आरजी कर रेप एवं हत्या मामला और संदेशखाली जैसे मामलों में उचित जांच नहीं हुई थी।
इनपुट: IANS



