मंगलवार, 28 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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दिल्ली: 70 करोड़ की ठगी वाला 'म्यूल अकाउंट' रैकेट बेनकाब, बैंक मैनेजर समेत 10 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने एक बड़े संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर देश-विदेश के ठगों को उपलब्ध कराता था। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने…

दिल्ली: 70 करोड़ की ठगी वाला 'म्यूल अकाउंट' रैकेट बेनकाब, बैंक मैनेजर समेत 10 गिरफ्तार
(फोटो: IANS)

दिल्ली पुलिस ने एक बड़े संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर देश-विदेश के ठगों को उपलब्ध कराता था। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने पिछले तीन-चार सालों में सैकड़ों बैंक खातों के जरिए 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में एक बैंक मैनेजर सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।

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यह पूरा मामला तब सामने आया जब दिल्ली के बलजीत नगर निवासी एक व्यक्ति ने 'वर्क फ्रॉम होम' के झांसे में आकर 10,000 रुपये गंवा दिए। शिकायतकर्ता ने बताया कि रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराने के बाद ठगों ने उससे संपर्क तोड़ दिया। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज इस शिकायत की जांच सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन ने शुरू की।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क?

पुलिस जांच में पता चला कि ठगी की रकम कई खातों से घूमकर 'डैमियन ट्रेडर्स' नामक एक फर्जी कंपनी के एक्सिस बैंक खाते में पहुंची थी। डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस ने 8 जुलाई को मोहित सोनी को गिरफ्तार किया, जिसने इस पूरे रैकेट का खुलासा किया। गिरोह के सदस्य भोले-भाले लोगों के दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर फर्जी फर्में और शेल कंपनियां बनाते थे। फिर, बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से इन कंपनियों के नाम पर करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। इन खातों की पूरी किट, जिसमें नेट बैंकिंग डिटेल्स, डेबिट कार्ड, चेक बुक और फर्जी मुहरें शामिल होती थीं, साइबर अपराधियों को बेच दी जाती थीं।

छापेमारी और बड़ी गिरफ्तारियां

जांच में दिशांत खन्ना का नाम मुख्य समन्वयक के रूप में सामने आया, जो बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर यह नेटवर्क चला रहा था। पुलिस ने 14 जुलाई को शालीमार बाग में छापेमारी कर मास्टरमाइंड दिशांत खन्ना और उसके साथी मृदुल को गिरफ्तार किया। इसी कार्रवाई में सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के ब्रांच मैनेजर कुंदन कुमार को भी पकड़ा गया, जिस पर खाते खुलवाने के बदले रिश्वत लेने का आरोप है। कुछ पैसे सीधे उसके निजी खाते में भी ट्रांसफर किए गए थे।

पुलिस ने इस कार्रवाई में कुल 248 बैंक अकाउंट किट, 38 सिम कार्ड, 22 मोबाइल फोन, 28 फर्जी कंपनियों की मुहरें, 55 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, एक लाख रुपये नकद और एक कार बरामद की है। गिरफ्तार किए गए छह मुख्य आरोपियों की पहचान दिशांत खन्ना (36), कुंदन कुमार (35), मोहित सोनी (26), योगेश कुमार (35), रंजीत डेमियन एक्का (41) और मृदुल (22) के रूप में हुई है।

देशव्यापी ठगी और बैंककर्मियों की भूमिका

इस गिरोह के तार भारत के अलावा दुबई और यूनाइटेड किंगडम में सक्रिय साइबर ठगों से भी जुड़े थे। जांच में पता चला कि बरामद किए गए 248 बैंक खाते देश के 19 राज्यों में दर्ज 156 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े हैं, जिनमें 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी हुई है।

पुलिस ने इंडसइंड बैंक से जुड़े चार अन्य लोगों को भी पकड़ा है, जिनमें एक मैनेजर, एक डिप्टी मैनेजर, एक टेलर और एक इंश्योरेंस एजेंट शामिल हैं। उन पर केवाईसी नियमों की अनदेखी कर खाते खोलने में मदद करने का आरोप है। अधिकारियों ने अब तक लगभग 56 लाख रुपये फ्रीज कर दिए हैं, जबकि विवादित कुल रकम करीब 37 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस अब एक भारतीय और यूएई में बैठे एक अन्य मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है, जिनके खिलाफ 'लुक आउट सर्कुलर' (एलओसी) भी जारी किया गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social दिल्ली डेस्क

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