बुधवार, 1 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

राघव चड्ढा केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 पोस्ट हटाने का दिया आदेश, वकील बोले - 'संगठित मानहानि पर अहम रोक'

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे एक अभियान के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मानहानिकारक पाई गईं पांच पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया है। इस फैसले को चड्ढा के वकीलों

राघव चड्ढा केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 पोस्ट हटाने का दिया आदेश, वकील बोले - 'संगठित मानहानि पर अहम रोक'
(फोटो: IANS)

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे एक अभियान के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मानहानिकारक पाई गईं पांच पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया है। इस फैसले को चड्ढा के वकीलों ने "संगठित ऑनलाइन मानहानि" के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने हालांकि चड्ढा की उस व्यापक मांग को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ सभी चिह्नित ऑनलाइन सामग्री हटाने और अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरिम राहत मांगी थी।

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बुधवार को न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने कहा कि यह मामला पहली नजर में व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) के उल्लंघन का नहीं बनता है। न्यायमूर्ति प्रसाद ने टिप्पणी की, "इस मामले में व्यक्तित्व अधिकारों का प्रश्न नहीं उठता। हालांकि, मैंने केवल पांच दस्तावेज हटाने का आदेश दिया है। शेष सामग्री प्रथमदृष्टया मानहानिकारक नहीं है।" अदालत ने यह भी कहा कि कुछ सामग्री राजनीतिक निर्णय की आलोचना प्रतीत होती है, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि आलोचना और मानहानि के बीच एक बहुत पतली रेखा होती है।

सुनियोजित अभियान का आरोप

राघव चड्ढा के वकीलों ने अदालत को बताया था कि सांसद की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए एक सुनियोजित और कथित तौर पर भुगतान-आधारित सोशल मीडिया अभियान चलाया जा रहा था। उनके अनुसार, कई इन्फ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स ने, जिन्हें कथित रूप से मार्केटिंग एजेंसियों के माध्यम से भुगतान किया गया था, कुछ ही मिनटों के अंतराल पर विभिन्न प्लेटफार्मों पर एक जैसी मानहानिकारक सामग्री साझा की।

चड्ढा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनी डीपफेक और मॉर्फ्ड सामग्री का इस्तेमाल कर यह झूठा प्रचार किया जा रहा है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल होने के लिए "पैसों के बदले खुद को बेच दिया"।

'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में चरित्र हनन नहीं'

फैसले के बाद, राघव चड्ढा की ओर से पेश अधिवक्ता सतत्य आनंद और निखिल अराधे ने एक बयान जारी कर अदालत के आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा, "यह आदेश इस सिद्धांत को भी मजबूत करता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में भुगतान लेकर सुनियोजित तरीके से किसी की छवि खराब करने और चरित्र हनन का अभियान नहीं चलाया जा सकता।" वकीलों ने इस फैसले को सार्वजनिक विमर्श की गरिमा की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना है।

इनपुट: IANS

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