इंजीनियर राशिद की जमानत: दिल्ली हाईकोर्ट ने NIA से पूछा — क्या कड़ी शर्तों के साथ रिहाई संभव है?
लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर की बारामुला सीट से बड़ी जीत दर्ज करने वाले सांसद अब्दुल राशिद शेख, जिन्हें इंजीनियर राशिद के नाम से जाना जाता है, की नियमित जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई…
लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर की बारामुला सीट से बड़ी जीत दर्ज करने वाले सांसद अब्दुल राशिद शेख, जिन्हें इंजीनियर राशिद के नाम से जाना जाता है, की नियमित जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से यह बताने को कहा है कि क्या राशिद को कुछ कड़ी शर्तों के साथ जमानत पर रिहा किया जा सकता है। अदालत ने यह संकेत भी दिया कि इन शर्तों में उन्हें दिल्ली में ही रहने का निर्देश शामिल हो सकता है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ राशिद की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने आतंकी फंडिंग मामले में निचली अदालत द्वारा जमानत खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। यह मामला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज है और राशिद कई वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं।
एनआईए का जमानत पर कड़ा विरोध
सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि राशिद के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और उन पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। एनआईए के वकील ने कहा कि राशिद पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और एक आतंकवादी से संबंध रखने के आरोप हैं। इस पर हाईकोर्ट ने एजेंसी से निर्देश लेकर जवाब दाखिल करने को कहा है।
अदालत का निर्देश और अगली सुनवाई
एनआईए ने अदालत को बताया कि इस मामले में दो गवाहों की गवाही बहुत महत्वपूर्ण है, जिनमें से एक संरक्षित गवाह भी है। इसे देखते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले इन दोनों गवाहों के बयान दर्ज कर लिए जाएं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तारीख तय की गई है।
गौरतलब है कि इंजीनियर राशिद ने जेल में रहते हुए ही 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को दो लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराकर बारामुला सीट पर जीत हासिल की थी। इससे पहले भी उन्हें संसद सत्र में हिस्सा लेने और पारिवारिक कारणों से कस्टडी पैरोल या अंतरिम जमानत मिलती रही है।
इनपुट: IANS



