दिल्ली आबकारी नीति केस: केजरीवाल और सिसोदिया को जवाब देने के लिए हाई कोर्ट से मिली 4 हफ़्ते की मोहलत
दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ़्ते का…
दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ़्ते का अतिरिक्त समय दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मोहलत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक याचिका पर दी गई है, जिसमें निचली अदालत द्वारा इन नेताओं को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने इसे जवाब दाखिल करने का 'अंतिम अवसर' बताते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 और 6 अक्टूबर की तारीखें तय की हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उस दिन सभी पक्षों की दलीलें एक साथ सुनी जाएंगी और आगे कोई और मोहलत नहीं दी जाएगी। CBI की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं द्वारा और समय मांगने की याचिका का विरोध करते हुए इसे बचकाना बताया था।
CBI की याचिका और निचली अदालत का फैसला
CBI ने अपनी पुनरीक्षण याचिका में आरोप लगाया है कि उस समय की 'आप' सरकार द्वारा लागू की गई आबकारी नीति में चुनिंदा शराब व्यापारियों को रिश्वत के बदले फायदा पहुंचाने के लिए हेरफेर किया गया था। वहीं, मनीष सिसोदिया ने अपनी याचिका में कहा था कि CBI ने निचली अदालत के फैसले के महज़ 4 घंटे के भीतर ही 'बिना सोचे-समझे' यह याचिका दायर कर दी। उन्होंने यह भी कहा कि याचिका में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस आरोपी के खिलाफ़ कौन से सबूत को नज़रअंदाज़ किया गया था।
गौरतलब है कि 27 फरवरी को एक विस्तृत फैसले में निचली अदालत ने CBI द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के इस मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। 1,100 से अधिक पैराग्राफ के उस फैसले को ही CBI ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
न्यायपालिका की अवमानना का एक और मामला
यह मामला न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ से स्थानांतरित होकर न्यायमूर्ति जैन के पास आया है। इसका कारण यह है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह समेत कई 'आप' नेताओं के खिलाफ़ एक अलग आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी। उन पर आबकारी नीति मामले के संबंध में न्यायपालिका को निशाना बनाने वाली 'अपमानजनक और मानहानिकारक' सामग्री प्रसारित करने का आरोप है।
4 अगस्त को हाई कोर्ट ने इसी अवमानना मामले की सुनवाई 21 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी थी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और रविंदर दुदेजा की खंडपीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि अवमानना का आधार बनी सामग्री सभी प्रतिवादियों को डिजिटल रूप में मुहैया कराई जाए।
इनपुट: IANS



