शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
दिल्ली

दिल्ली दंगा 2020: उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाओं पर फैसला फिलहाल टल गया है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शनिवार को दोनों पक्षों की

दिल्ली दंगा 2020: उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
(फोटो: IANS)

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाओं पर फैसला फिलहाल टल गया है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शनिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) समेत कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है।

विज्ञापन

सुनवाई के दौरान, शरजील इमाम के वकील ने दलील दी कि उन्हें इस मामले में लगभग छह साल से जेल में रखा गया है और मुकदमे की सुनवाई में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए छह महीने से ज़्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक आरोप तय करने पर बहस भी पूरी नहीं हो पाई है। उमर खालिद ने भी इन्हीं आधारों पर ट्रायल कोर्ट से नियमित जमानत की मांग की है।

कानूनी पेंच और सुप्रीम कोर्ट का रुख

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई सामग्री प्रथम दृष्टया यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर लगी रोक को सही ठहराती है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले के अन्य आरोपियों के प्रति अलग रहा है। शीर्ष अदालत ने इसी मामले में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान समेत पांच अन्य सह-आरोपियों को जमानत दे दी थी। हाल ही में, तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को भी छह महीने की अंतरिम जमानत दी गई।

एक अहम सवाल बड़ी बेंच के पास

खालिद सैफी और तस्लीम अहमद को जमानत देते समय सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल विचार के लिए एक बड़ी बेंच को भेज दिया था। सवाल यह है कि क्या लंबे समय तक जेल में बंद रहना और मुकदमे में अत्यधिक देरी, यूएपीए की धारा 43डी(5) के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, जमानत का आधार हो सकता है? अदालत ने माना था कि इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत की अलग-अलग पीठों ने अलग-अलग व्याख्याएं की हैं।

इनपुट: IANS

N

News4Social वायर डेस्क

News4Social का वायर डेस्क समाचार एजेंसियों (IANS आदि) की लाइसेंस-प्राप्त फीड से ताज़ा व प्रामाणिक राष्ट्रीय, राज्य और विषय-आधारित खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर का स्रोत स्पष्ट रूप से श्रेय (credit) के साथ दिया जाता है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →