लालू यादव परिवार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने पर फैसला टला
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य सहयोगियों के खिलाफ कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने पर दिल्ली की एक अदालत ने…
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य सहयोगियों के खिलाफ कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने पर दिल्ली की एक अदालत ने अपना फैसला टाल दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला अब 10 सितंबर को सुनाया जा सकता है। यह मामला IRCTC होटल आवंटन घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है।
लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए (2004-2009) IRCTC के होटलों के संचालन के ठेके देने में कथित अनियमितताओं को लेकर यह पूरा मामला सामने आया था। ईडी ने अपनी जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज FIR को आधार बनाया है, जिसमें कथित घोटाले से हुई कमाई की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया है।
क्या हैं मामले के मुख्य आरोप?
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि होटलों के रखरखाव के ठेके, तय नियमों को ताक पर रखकर, राजद सुप्रीमो के करीबी सहयोगियों से जुड़ी एक निजी कंपनी को दिए गए थे। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि इस सौदे के बदले में लालू यादव के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़ी एक बेनामी कंपनी के माध्यम से तीन एकड़ की एक प्रमुख ज़मीन का अधिग्रहण किया गया था।
मामले में कौन-कौन हैं आरोपी?
इस मामले में लालू प्रसाद यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव भी आरोपी हैं। उनकी बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव के साथ-साथ कुछ अन्य लोगों के नाम भी इसमें शामिल हैं। इससे पहले, राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आरोप तय करने पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय में इसी घोटाले से जुड़े एक अन्य भ्रष्टाचार मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की याचिकाओं पर भी सुनवाई चल रही है। उन्होंने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था। पिछले साल अक्टूबर में, अदालत ने धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप तय किए थे, जबकि सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया था।
इनपुट: IANS



