मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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अमेरिकी टैरिफ की आशंका से तांबे की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल, जानें बाजार पर इसका असर

तांबे की कीमतें एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसका मुख्य कारण अमेरिका द्वारा इस पर टैरिफ लगाने की आशंका है। इस डर से व्यापारी अपना स्टॉक अमेरिकी बाजारों में भेज रहे हैं, जिससे दुनिया के अन्य…

अमेरिकी टैरिफ की आशंका से तांबे की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल, जानें बाजार पर इसका असर
(फोटो: IANS)

तांबे की कीमतें एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसका मुख्य कारण अमेरिका द्वारा इस पर टैरिफ लगाने की आशंका है। इस डर से व्यापारी अपना स्टॉक अमेरिकी बाजारों में भेज रहे हैं, जिससे दुनिया के अन्य हिस्सों में इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम ने लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबे के वायदा भाव को अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है।

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LME पर तीन महीने के वायदा कारोबार में तांबे की कीमत 0.8% बढ़कर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गई। यह जनवरी में बने 14,527.50 डॉलर के पिछले रिकॉर्ड से भी ज़्यादा है। सिर्फ इसी साल तांबे की कीमतों में लगभग 17% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले 12 महीनों का आंकड़ा देखें तो यह करीब 47% तक चढ़ चुका है।

घरेलू बाजार पर भी दिखा असर

कीमतों में इस वैश्विक तेजी का असर भारत के घरेलू बाजार पर भी साफ दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर वायदा के लिए तांबे का भाव 1.21% यानी 16.8 रुपये चढ़कर 1,403.50 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। यह आंकड़ा सुबह 10:30 बजे तक का है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

कीमतों में यह उछाल मांग और आपूर्ति के बीच लंबे समय से चल रहे असंतुलन को भी दिखाता है। एक तरफ पुरानी खदानों से उत्पादन घट रहा है, तो दूसरी तरफ डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और बिजली ग्रिड जैसी जगहों पर इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि, हालिया तेजी का तात्कालिक कारण अंतिम उपभोक्ताओं की मांग में अचानक बढ़ोतरी नहीं, बल्कि टैरिफ की आशंका से आपूर्ति का एक जगह केंद्रित होना है।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग को रिफाइंड तांबे पर टैरिफ की जरूरत को लेकर व्हाइट हाउस को सलाह देनी थी, लेकिन 30 जून की समयसीमा बीत जाने के दो महीने बाद भी कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।

बाजार की मौजूदा स्थिति

भले ही वैश्विक स्तर पर तांबे का भंडार अभी भी ऊंचा है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अमेरिका में जमा हो गया है। इस वजह से LME नेटवर्क पर उपलब्ध तांबे की मात्रा घट गई है। बाजार में एक और दिलचस्प स्थिति देखने को मिल रही है, जिसे 'बैकवर्डेशन' कहते हैं। इसमें हाजिर तांबा (तुरंत डिलीवरी वाला) तीन महीने के वायदा भाव से ज़्यादा कीमत पर बिक रहा है। यह स्थिति बताती है कि निकट भविष्य में आपूर्ति में कमी बनी रह सकती है। वहीं, रिपोर्टों के अनुसार 2026 की पहली छमाही में वैश्विक तांबा खदान उत्पादन में करीब 1% की गिरावट आई है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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