खनन कानून संशोधन: केरल ने PM मोदी को पत्र लिखकर राज्यों के अधिकारों में कटौती पर जताई चिंता
केरल ने खनन और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर इन बदलावों की तत्काल समीक्षा…
केरल ने खनन और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर इन बदलावों की तत्काल समीक्षा करने का आग्रह किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि ये संशोधन राज्यों की संवैधानिक और वित्तीय शक्तियों को सीमित कर सकते हैं, जिससे केरल के राजस्व हितों को गहरा नुकसान पहुंच सकता है।
यह मामला केंद्र-राज्य के बीच वित्तीय शक्तियों को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है। केरल की मुख्य चिंता यह है कि यदि खनिजों से युक्त भूमि पर राज्य के कर लगाने के अधिकार में कटौती की जाती है, तो इससे राज्य और स्थानीय निकायों के लिए राजस्व का एक नया संकट खड़ा हो सकता है।
संवैधानिक शक्तियों पर सीधा दखल
पत्र में विशेष रूप से प्रस्तावित धारा 9डी पर आपत्ति जताई गई है। इसके तहत, खनिज भंडार वाली भूमि पर कर, उपकर और अन्य शुल्क लगाने की शक्ति केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अधीन हो जाएगी। मुख्यमंत्री सतीशन ने तर्क दिया कि यह प्रावधान सीधे तौर पर राज्यों की संवैधानिक शक्तियों में हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि बिल में खनिज युक्त भूमि को केंद्र के नियामक दायरे में लाने और राज्य की पिछली बकाया कर देनदारियों को खत्म करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।
राजस्व पर गंभीर असर की आशंका
मुख्यमंत्री ने चेताया है कि इन प्रस्तावित बदलावों के केरल के लिए गंभीर वित्तीय परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि राज्य में खनिज संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि खनिज भूमि पर राज्य की वित्तीय शक्तियों पर किसी भी तरह की रोक न केवल राज्य के राजस्व को प्रभावित करेगी, बल्कि स्थानीय स्व-शासन संस्थाओं की कर आय पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
सतीशन ने अपने पत्र में खनन अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट के 2024 के एक फैसले का भी जिक्र किया। उन्होंने तर्क दिया कि उस फैसले में रॉयल्टी और टैक्स के बीच स्पष्ट रूप से अंतर बताया गया था, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि खनन अधिकारों के लिए दी जाने वाली रॉयल्टी कोई टैक्स नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान की 7वीं अनुसूची की सूची-II की प्रविष्टि 50 राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति देती है।
इसी तरह, उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सूची-II की प्रविष्टि 49 के तहत भी राज्यों की इस शक्ति को मान्यता दी है कि वे खनिज उत्पादन की मात्रा या मूल्य के आधार पर खनिज संसाधनों वाली भूमि पर कर लगा सकते हैं। इन तर्कों के आधार पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए केंद्र से उन प्रावधानों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, जो राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को कमजोर करते हैं।
इनपुट: IANS



