बैंक से ₹2.68 करोड़ की धोखाधड़ी: चेन्नई की स्टील कंपनी और छह लोग दोषी, CBI कोर्ट ने सुनाई सज़ा
करीब 16 साल पुराने एक बैंक धोखाधड़ी मामले में चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने 2.68 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के लिए एक स्टील ट्रेडिंग फर्म और छह अन्य लोगों को दोषी करार…
करीब 16 साल पुराने एक बैंक धोखाधड़ी मामले में चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने 2.68 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के लिए एक स्टील ट्रेडिंग फर्म और छह अन्य लोगों को दोषी करार दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में आरोपियों ने जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक से क्रेडिट सुविधाएं हासिल की थीं और फिर फंड का गलत इस्तेमाल किया था।
सोमवार को दिए अपने फैसले में अदालत ने एम/एस जेलानी स्टील ट्रेडर्स नाम की कंपनी के साथ एस. अमुरुदीन, एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एम. शिवकुमार और एम. रविचंद्रन बाबू को आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का दोषी पाया।
सजा और जुर्माना
अदालत ने दोषी एस. अमुरुदीन को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, बाकी पांच दोषियों को छह-छह महीने के कठोर कारावास की सजा दी गई। अदालत ने इन छह लोगों पर कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा, दोषी ठहराई गई फर्म एम/एस जेलानी स्टील ट्रेडर्स पर 20,000 रुपये का अलग से जुर्माना लगाया गया है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 2008 का है जब यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (अब पंजाब नेशनल बैंक में विलय) ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी। सीबीआई ने 21 अप्रैल, 2008 को केस दर्ज कर जांच शुरू की। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, कंपनी और अन्य आरोपियों ने मिलकर बैंक को धोखा देने की साजिश रची। उन्होंने झूठे और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक से कई क्रेडिट सुविधाएं प्राप्त कीं और फिर उस पैसे का गबन कर लिया, जिससे बैंक को 2.68 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ।
लंबी जांच के बाद सीबीआई ने 23 जून, 2009 को कंपनी और 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कई सालों तक चले मुकदमे के बाद अदालत ने अब सात आरोपियों के खिलाफ अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने इसी मामले में आरोपी बनाए गए यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर एसआर. ज्ञानसेकर और एम. चक्रवर्ती समेत बैंक के पैनल वकील पीबी संपत कुमार को बरी कर दिया।
इनपुट: IANS



