FCI को 28 करोड़ की चपत: चावल बिक्री में घोटाले को लेकर CBI ने 3 अधिकारियों समेत 8 पर केस दर्ज किया
भारतीय खाद्य निगम (FCI) को करीब 28.87 करोड़ रुपए का नुकसान पहुँचाने वाले एक कथित चावल घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, CBI ने FCI के तीन…
भारतीय खाद्य निगम (FCI) को करीब 28.87 करोड़ रुपए का नुकसान पहुँचाने वाले एक कथित चावल घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, CBI ने FCI के तीन वरिष्ठ अधिकारियों समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।
यह मामला FCI के दिल्ली क्षेत्र से गुवाहाटी स्थित नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (NERAMAC) को चावल की बिक्री में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि नियमों का उल्लंघन कर चावल को रियायती दरों पर बेचा गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
कौन-कौन हैं आरोपी?
CBI द्वारा 27 अगस्त को दर्ज की गई FIR में FCI और NERAMAC के तत्कालीन अधिकारियों के साथ-साथ निजी कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
FCI के अधिकारी:
- कुन्हीरामन पद्मिनी आशा (तत्कालीन महाप्रबंधक, दिल्ली क्षेत्र)
- ब्रह्म प्रकाश (तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक, बिक्री)
- अमरेंद्र विक्रम (तत्कालीन प्रबंधक, बिक्री)
NERAMAC के अधिकारी:
- भास्कर बरुआ (तत्कालीन प्रबंध निदेशक)
- अंजन कुमार दत्ता (तत्कालीन अतिरिक्त महाप्रबंधक)
- दिलीप साहा (तत्कालीन उप प्रबंधक, कृषि-व्यवसाय)
निजी संस्थाएं:
- राजेश बजाज (उत्पलक्षी एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और दिबेश कमर्शियल्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक)
- पंकज सराफ (सुपर ग्रेन्स, कोलकाता के पार्टनर)
घोटाला कैसे हुआ?
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की शिकायत पर गठित एक जांच समिति ने पाया कि FCI के दिल्ली क्षेत्र ने NERAMAC को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था। इसमें से NERAMAC ने लगभग 50,645 मीट्रिक टन चावल 23,200 रुपए प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर उठाया। जबकि उस समय चावल की प्रचलित आरक्षित कीमत 28,900 रुपए प्रति मीट्रिक टन थी।
आरोपों के मुताबिक, 10 जुलाई, 2015 की 'ओपन मार्केट सेल स्कीम' नीति के तहत NERAMAC बिना ई-नीलामी के चावल खरीदने का पात्र नहीं था। यह सुविधा केवल राज्य सरकारों और उनके निगमों के लिए थी। यह भी पाया गया कि चावल के लिए भुगतान विभिन्न निजी संस्थाओं, जैसे मिल मालिकों और थोक व्यापारियों के माध्यम से किया गया था। CBI ने बताया कि सक्षम अधिकारियों से सभी सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक मंजूरी मिल चुकी है।
इनपुट: IANS



