चेन्नई: 2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में 15 साल बाद आया फैसला, 7 दोषी करार
यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के साथ करीब 2.68 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के एक मामले में चेन्नई की सीबीआई अदालत ने एक निजी फर्म समेत सात आरोपियों को दोषी ठहराया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक…
यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के साथ करीब 2.68 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के एक मामले में चेन्नई की सीबीआई अदालत ने एक निजी फर्म समेत सात आरोपियों को दोषी ठहराया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला 15 साल से भी ज्यादा पुराना है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से क्रेडिट सुविधाएं लेकर रकम का गबन किया गया था।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 21 अप्रैल 2008 को बैंक की शिकायत पर यह केस दर्ज किया था। जांच में पाया गया कि मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स और अन्य आरोपियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची थी।
सजा और जुर्माना
अदालत ने 31 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाया। इसमें निजी फर्म मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। मुख्य आरोपी एस. अमरुद्दीन को 2 साल के सश्रम कारावास की सजा मिली है। वहीं, अन्य पांच दोषियों—एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एम. शिवकुमार और एम. रविचंद्रन बाबू—को 6-6 महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। इन छहों दोषियों पर कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मामले में अन्य आरोपी
सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद 23 जून 2009 को 14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लंबी सुनवाई के दौरान, चार निजी आरोपी (जैलानी बीवी, ए. श्रीनिवासन, एन. मनोहरण और एस. जी. शेखर) की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। वहीं, अदालत ने बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक एस.आर. ज्ञानशेखर और एक अन्य व्यक्ति एम. चक्रवर्ती को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि बैंक के पैनल एडवोकेट पी.बी. संपत कुमार को पहले ही आरोपमुक्त कर दिया गया था।
इनपुट: IANS



