रेणुकास्वामी हत्याकांड: सरकारी गवाह बनाने के फैसले के खिलाफ़ हाईकोर्ट पहुँचे अभिनेता दर्शन
बेंगलुरु के चर्चित रेणुकास्वामी हत्याकांड में आरोपी कन्नड़ अभिनेता दर्शन ने एक सह-आरोपी को सरकारी गवाह बनाने के निचली अदालत के फैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी है। समाचार एजेंसी IANS के…
बेंगलुरु के चर्चित रेणुकास्वामी हत्याकांड में आरोपी कन्नड़ अभिनेता दर्शन ने एक सह-आरोपी को सरकारी गवाह बनाने के निचली अदालत के फैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दर्शन ने अपनी याचिका में मामले के 14वें आरोपी प्रदोष को माफी देकर गवाह बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और इस पर रोक लगाने की मांग की है।
यह मामला जून 2024 में 33 वर्षीय रेणुकास्वामी की हत्या से जुड़ा है, जिसमें दर्शन और अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा समेत कई लोग आरोपी हैं। चित्तरदुर्गा निवासी रेणुकास्वामी को कथित तौर पर अगवा कर बेंगलुरु लाया गया, जहां उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उनका शव एक नाले के पास मिला था, जिसके बाद पुलिस ने कई गिरफ्तारियां की थीं। दर्शन फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में हैं।
क्या है याचिका का आधार?
बेंगलुरु की 59वीं सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट ने 25 अगस्त को प्रदोष की अर्जी मंजूर करते हुए उसे कुछ शर्तों पर माफी देकर सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की अनुमति दे दी थी। इसके बाद अदालत ने बयान दर्ज कराने के लिए उसे समन भी जारी किया। दर्शन ने अब इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रदोष को सरकारी गवाह बनाने में अपनाई गई कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए।
अदालत का पिछला रुख
हालांकि, इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट और निचली अदालत, दोनों ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी आरोपी को माफी देने की कार्यवाही में अन्य सह-आरोपियों को शामिल होने या उसका विरोध करने का कानूनी अधिकार नहीं होता है। अदालतों के मुताबिक, सह-आरोपियों का अधिकार तब शुरू होता है, जब सरकारी गवाह अपना बयान दर्ज करा देता है और उससे जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) की प्रक्रिया शुरू होती है। दर्शन ने अपनी याचिका में इसी प्रक्रिया और फैसले को चुनौती दी है।
इनपुट: IANS



