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गुजरात में चांदीपुरा वायरस का बढ़ता कहर: 41 मामलों की पुष्टि, 27 लोगों की मौत

गुजरात में जून के अंत से शुरू हुए चांदीपुरा वायरस के प्रकोप ने गंभीर रूप ले लिया है, जिससे अब तक 27 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस वायरस के…

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का बढ़ता कहर: 41 मामलों की पुष्टि, 27 लोगों की मौत
(फोटो: IANS)

गुजरात में जून के अंत से शुरू हुए चांदीपुरा वायरस के प्रकोप ने गंभीर रूप ले लिया है, जिससे अब तक 27 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस वायरस के 41 मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हो चुकी है। यह जानकारी समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जून से शुरू हुई निगरानी अवधि के दौरान 14 अगस्त की शाम तक कुल 257 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 246 सैंपलों की जांच रिपोर्ट आ चुकी है, जबकि 11 की रिपोर्ट का अभी इंतजार है। जांचे गए सैंपलों में से 41 में चांदीपुरा वायरस संक्रमण पाया गया है, जो पिछले महीने के मुकाबले काफी बड़ी वृद्धि दर्शाता है। 21 जुलाई को राज्य में केवल 12 पुष्ट मामले थे।

क्या है चांदीपुरा वायरस और इसके लक्षण?

चांदीपुरा वायरस एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से जुड़ा एक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के काटने से फैलता है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार, यह वायरस खासकर 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है। इसके मुख्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार, उल्टी, दौरे पड़ना और मानसिक स्थिति में बदलाव शामिल हैं, जो तेजी से गंभीर रूप ले सकते हैं।

रोकथाम के लिए सरकार के प्रयास

मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में निगरानी और रोकथाम के उपाय तेज कर दिए हैं। इसके तहत घर-घर जाकर लोगों की जांच की जा रही है और सैंडफ्लाई पर नियंत्रण के लिए कीटनाशकों का छिड़काव व स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इस वायरस के लिए अभी तक कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है।

विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण से बचने के लिए सैंडफ्लाई के संपर्क में आने से बचना महत्वपूर्ण है। इसके लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने, मच्छरदानी का उपयोग करने और अपने आसपास साफ-सफाई रखने की सलाह दी जाती है। गौरतलब है कि दो साल पहले भी गुजरात चांदीपुरा वायरस के बड़े प्रकोप से जूझ चुका है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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