गुजरात में 1 लाख युवाओं को मिलेगा इंडस्ट्री-रेडी स्किल ट्रेनिंग, 250 से ज़्यादा संस्थान और उद्योग बने भागीदार
गुजरात सरकार ने राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। 'विकसित और आत्मनिर्भर गुजरात' के लक्ष्य को साधते हुए इस साल (2026-27) एक लाख युवाओं को उद्योग-उन्मुख कौशल…
गुजरात सरकार ने राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। 'विकसित और आत्मनिर्भर गुजरात' के लक्ष्य को साधते हुए इस साल (2026-27) एक लाख युवाओं को उद्योग-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सरकार ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
इस मिशन के तहत 250 से अधिक औद्योगिक इकाइयों और शैक्षणिक संस्थानों ने युवाओं को प्रशिक्षित करने में दिलचस्पी दिखाई है। इनमें एलएंडटी, आर्सेलर मित्तल ग्रुप, मारुति सुजुकी, टाटा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स और गणपत यूनिवर्सिटी जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिन्होंने सरकार के साथ साझेदारी के लिए अपने प्रस्ताव दिए हैं।
क्या है 'नमो गुजरात कौशल एवं रोजगार मिशन'?
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हाल ही में लॉन्च किए गए 'नमो गुजरात कौशल एवं रोजगार मिशन' (एनजीकेआरएम) के तहत संचालित किया जा रहा है। इसका एक प्रमुख हिस्सा 'गुजरात इंस्टीट्यूट्स फॉर एडवांस्ड स्किल्स' (जीआईएएस) है, जो मांग-आधारित और उद्योग-संचालित इकोसिस्टम बनाने का काम करेगा। श्रम, कौशल विकास और रोजगार मंत्री कुंवरजी बावलिया ने कहा, "इस मिशन का उद्देश्य पूरे राज्य में एडवांस्ड कौशल विकास और रोजगार निर्माण के लिए मांग-आधारित और उद्योग-संचालित इकोसिस्टम बनाना है।"
यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग' के मंत्र पर आधारित है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य सालाना पांच लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का है, जिसकी शुरुआत इस साल एक लाख से हो रही है।
किन क्षेत्रों में दी जाएगी ट्रेनिंग?
यह कार्यक्रम भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। श्रम, कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया के अनुसार, इसमें 20 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे निर्माण, हेल्थकेयर, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को शामिल किया गया है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), साइबर सिक्योरिटी और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसी 12 नई टेक्नोलॉजी पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।
किसे मिलेगा लाभ और कैसे होगी प्रक्रिया?
इस कार्यक्रम का लाभ 14 से 59 वर्ष की आयु के लोग उठा सकते हैं। इनमें महिलाएं, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिक, अपने कौशल को बेहतर बनाने के इच्छुक मौजूदा कामगार और बेरोजगार युवा शामिल होंगे। प्रशिक्षण पूरी तरह से निशुल्क होगा और इसमें आवासीय व गैर-आवासीय दोनों तरह के मॉडल अपनाए जाएंगे।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर जियो-फेंस्ड बायोमेट्रिक उपस्थिति, सीसीटीवी निगरानी और ब्रॉडबैंड जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी। प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए हर 120 घंटे के प्रशिक्षण के लिए 500 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।
इनपुट: IANS



