शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

विकास और पूंजीगत खर्च को गति देने के लिए केंद्र ने राज्यों को ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त किस्त जारी की

केंद्र सरकार ने राज्यों को वित्तीय रूप से और मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने शनिवार को राज्यों को कर हस्तांतरण (Tax Devolution) के तह…

विकास और पूंजीगत खर्च को गति देने के लिए केंद्र ने राज्यों को ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त किस्त जारी की
(फोटो: IANS)

केंद्र सरकार ने राज्यों को वित्तीय रूप से और मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने शनिवार को राज्यों को कर हस्तांतरण (Tax Devolution) के तहत ₹1,09,019 करोड़ की एक अतिरिक्त किस्त जारी की है। यह राशि 10 अगस्त को दी जाने वाली नियमित मासिक किस्त के अलावा है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्यों को अपनी विकास परियोजनाओं और पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) में तेज़ी लाने में मदद करना है।

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यह कदम केंद्र की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत राज्यों की वित्तीय क्षमता को मज़बूती दी जाती है। पूंजीगत व्यय का मतलब ऐसे खर्च से है जो सड़क, पुल, स्कूल और अस्पताल जैसी लंबी अवधि की संपत्ति बनाने में इस्तेमाल होता है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

किस राज्य को मिली कितनी राशि?

इस अतिरिक्त किस्त में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश को मिला है, जिसे ₹19,208 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसके बाद बिहार को ₹10,845 करोड़ और मध्य प्रदेश को ₹8,010 करोड़ मिले हैं।

अन्य प्रमुख राज्यों में पश्चिम बंगाल को ₹7,866 करोड़, महाराष्ट्र को ₹7,022 करोड़ और राजस्थान को ₹6,460 करोड़ की राशि दी गई है। इसके अलावा ओडिशा को ₹4,819 करोड़, आंध्र प्रदेश को ₹4,597 करोड़, कर्नाटक को ₹4,504 करोड़, तमिलनाडु को ₹4,466 करोड़ और झारखंड को ₹3,660 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि प्राप्त हुई है।

पहले भी जारी हो चुकी है अतिरिक्त किस्त

यह पहली बार नहीं है जब केंद्र ने नियमित मासिक हिस्से के अलावा अतिरिक्त राशि जारी की है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी त्योहारों के मौसम को देखते हुए राज्यों को ₹1,01,603 करोड़ की एक अतिरिक्त कर हस्तांतरण राशि दी गई थी। उस समय भी इसका उद्देश्य विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए राज्यों के पास पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करना था।

राजकोषीय घाटे की स्थिति

इस बीच, महालेखा नियंत्रक (CGA) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा ₹3.1 लाख करोड़ रहा। यह पूरे वित्त वर्ष के लिए तय बजटीय लक्ष्य का 18.2 प्रतिशत है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के ₹2.8 लाख करोड़ के घाटे से अधिक है, जो यह दिखाता है कि मजबूत राजस्व संग्रह के बावजूद सरकार ने अपने खर्च में बढ़ोतरी की है।

केंद्र ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ₹16.96 लाख करोड़ का राजकोषीय घाटा लक्षित किया है, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.3% है। अप्रैल-जून तिमाही में शुद्ध कर राजस्व पिछले साल के ₹5.4 लाख करोड़ की तुलना में बढ़कर ₹6.4 लाख करोड़ हो गया, जो आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद कर संग्रह में मज़बूती का संकेत है।

इनपुट: IANS

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