उड़ान योजना को मिलेगी नई रफ़्तार, सरकार अगले चरण में ₹28,840 करोड़ का निवेश करेगी
क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मज़बूत करने वाली ‘उड़ान’ योजना के अगले चरण में केंद्र सरकार एक बड़ा निवेश करने जा रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया है कि इस…
क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मज़बूत करने वाली ‘उड़ान’ योजना के अगले चरण में केंद्र सरकार एक बड़ा निवेश करने जा रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया है कि इस योजना के विस्तार के लिए 28,840 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले 10 वर्षों में किए गए कुल निवेश से लगभग तीन गुना अधिक है।
नायडू ने यह जानकारी शुक्रवार को कर्नाटक के मैसूर में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक के दौरान दी। उन्होंने कहा, "पिछले 10 वर्षों में, हमने हवाई अड्डों के विकास और एयरलाइंस के लिए 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (वीजीएफ) में लगभग 10,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। अब हम 'उड़ान' के अगले चरण के तहत 28,840 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ इस लक्ष्य को एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं।"
छोटे शहरों तक हवाई सेवा का विस्तार
मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत का हवाई सेवा क्षेत्र अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न से प्रेरित होकर यह क्षेत्रीय विकास का एक अहम ज़रिया बन रहा है, जिससे किसानों, निर्यातकों और स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ड्रोन और eVTOL (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग) जैसी नई तकनीकों में भी आगे बढ़ रहा है और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) जैसे क्षेत्रों में सुधार कर रहा है।
पायलटों के प्रशिक्षण पर भी फ़ोकस
बैठक में पायलटों को प्रशिक्षित करने वाले फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) के इकोसिस्टम में हुए सुधारों पर भी चर्चा हुई। समिति को बताया गया कि देश में FTO की संख्या 2020 में 32 से बढ़कर 2026 में 41 हो गई है, जबकि फ्लाइंग बेस 32 से बढ़कर 63 हो गए हैं।
मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि भारतीय एयरलाइंस बड़े पैमाने पर विमानों के ऑर्डर दे रही हैं, और इन विमानों को उड़ाने के लिए देश में ही कुशल कार्यबल तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया, "हम भारत के एविएशन सेक्टर के विकास को आगे बढ़ाने के लिए बाहर से वर्कफोर्स नहीं मंगाना चाहते। हम उस वर्कफोर्स को यहीं भारत में प्रशिक्षित करना चाहते हैं।"
इनपुट: IANS



