कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
कावेरी नदी के पानी के बँटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, तमिलनाडु ने कर्नाटक पर अपने हिस्से का पानी नहीं…
कावेरी नदी के पानी के बँटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, तमिलनाडु ने कर्नाटक पर अपने हिस्से का पानी नहीं छोड़ने का आरोप लगाया है, जिस पर सोमवार को शीर्ष अदालत ने सुनवाई की। अदालत ने तमिलनाडु को अपनी शिकायत कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष रखने की अनुमति देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की है।
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के सामने था। तमिलनाडु सरकार ने याचिका दायर कर कर्नाटक को 26.954 टीएमसी पानी छोड़ने का निर्देश देने की माँग की थी।
तमिलनाडु की दलीलें
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सी.एस. वैद्यनाथन ने पीठ को बताया कि सोमवार सुबह तक राज्य को CWMA के निर्देश के अनुसार पानी तो मिला है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, "हमारी शिकायत यह है कि CWMA ने कर्नाटक को पानी की उस तय मात्रा में हुई कमी को पूरा करने का निर्देश नहीं दिया है जो राज्य को मिलनी चाहिए थी।"
वैद्यनाथन ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि कर्नाटक के कावेरी जलाशयों में फिलहाल करीब 78 टीएमसी पानी है, लेकिन इसके बावजूद तमिलनाडु को उसके हिस्से का पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि सोमवार और मंगलवार को CWMA की बैठक हो रही है, जिसमें तमिलनाडु अपना पक्ष रखेगा।
अदालत का निर्देश
तमिलनाडु के वकील के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई अगले सप्ताह 31 अगस्त के लिए निर्धारित कर दी। अदालत ने कहा कि दोनों पक्ष पानी छोड़े जाने की ताज़ा स्थिति से उसे अवगत करा सकते हैं।
तमिलनाडु ने यह याचिका कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) और CWMA के निर्देशों का पालन न करने का आरोप लगाते हुए दायर की थी। CWRC ने 28 जुलाई की अपनी बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 12 अगस्त तक बिलिगुंड्लु में 3,500 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था, जिसका CWMA ने भी 30 जुलाई को समर्थन किया था।
इनपुट: IANS



