गुरूवार, 20 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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सीमावर्ती इलाके अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, किरेन रिजिजू ने चीनी घुसपैठ के दावों को किया खारिज

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के सीमावर्ती इलाके, जिन्हें पहले नजरअंदाज किया जाता था, अब सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गए हैं। समाचार…

सीमावर्ती इलाके अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, किरेन रिजिजू ने चीनी घुसपैठ के दावों को किया खारिज
(फोटो: IANS)

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के सीमावर्ती इलाके, जिन्हें पहले नजरअंदाज किया जाता था, अब सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गए हैं। समाचार एजेंसी IANS से एक विशेष बातचीत में उन्होंने विपक्ष के उन दावों को भी खारिज कर दिया, जिनमें भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ का आरोप लगाया गया था। रिजिजू ने कहा कि केंद्र सरकार सीमाई क्षेत्रों में विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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गुरुवार को रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों माजा, गालेमो और तक्सिंग के अपने दौरे का एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने कहा, "कुछ लोग सीमा को लेकर लापरवाही से टिप्पणी कर देते हैं। सीमाई क्षेत्र मुश्किल हैं, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार सीमा के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने बताया कि वह बुनियादी ढांचे के काम में तेजी लाने के लिए इन इलाकों में गए थे।

सीमा विवाद और घुसपैठ के आरोप

विपक्षी नेताओं, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए रिजिजू ने कहा कि अरुणाचल में चिंताओं को भारत-चीन सीमा के लंबे समय से तय नहीं होने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, "अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की बहुत लंबी सीमा है जिसे औपचारिक रूप से तय नहीं किया गया है। वहां कोई सीमा स्तंभ नहीं हैं... यह कोई नई बात नहीं है।"

रिजिजू ने माना कि सीमा तय न होने के कारण स्थानीय लोगों की चिंता जायज है, लेकिन उन्होंने बिना पुष्टि के वीडियो साझा कर जनता को गुमराह करने को गलत बताया। उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं है कि उन्होंने (चीन ने) हमारे किसी गांव पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने एक ऐसे भू-भाग पर डेरा डाला है, जहां सीमा निर्धारित नहीं है।"

बुनियादी ढांचे पर बदली नीति

रिजिजू ने सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर पिछली कांग्रेस सरकारों की नीति की आलोचना की। उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी के संसद में दिए बयान का हवाला देते हुए कहा, "उस समय भारत में कांग्रेस की सरकार थी... सरकार की नीति भारतीय तरफ बुनियादी ढांचा न बनाने की थी। वहीं चीन लगातार अपना ढांचा बनाता रहा।"

उनके अनुसार, 2014 में पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इस नीति को बदला गया। उन्होंने कहा, "पीएम मोदी ने नीति बदली और अब हमारी तरफ भी सड़कें बन रही हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से 'माजा' गया, जो अंतिम सीमा बिंदु पर स्थित गांव है... 1947 के बाद से आज तक सीमा पर कोई सड़क नहीं बनी थी। पीएम मोदी के नेतृत्व में हमने सड़क बनवाई।" उन्होंने 2019 में बने तक्सिंग तक के सड़क संपर्क का भी उल्लेख किया।

सीमा पर मौजूदा स्थिति और सुरक्षा

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि जिस गांव पर चीनी कब्जे की बात की जा रही है, वह लोंगजू से आगे एक घाटी में है और उस पर 1959 में ही कब्जा कर लिया गया था। उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने कुछ संरचनाएं बनाई हैं और यह दशकों से चीन के नियंत्रण में है।

केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की गश्त को मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि 'रीढ़ की पहाड़ी' पर चीनी सैन्य गतिविधि बढ़ी है, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ी है और सरकार इसे गंभीरता से ले रही है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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