पश्चिम बंगाल: सरकारी अस्पतालों में दवाओं की एक्सपायरी पर लगेगी रोक, हर हफ्ते होगी जांच के लिए नई SOP
पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मरीज़ों को अब एक्सपायर्ड दवाएं दिए जाने का खतरा कम होगा। राज्य सरकार ने मरीज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके…
पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मरीज़ों को अब एक्सपायर्ड दवाएं दिए जाने का खतरा कम होगा। राज्य सरकार ने मरीज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत दवाओं के स्टॉक की हर हफ्ते अनिवार्य जांच की जाएगी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग जल्द ही इस संबंध में एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने जा रहा है।
इस नई व्यवस्था को राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. शरद्वत मुखोपाध्याय ने अपनी मंज़ूरी दे दी है। इसका मुख्य लक्ष्य सरकारी अस्पतालों में एक्सपायर्ड दवाओं की मौजूदगी और उनके वितरण पर पूरी तरह से रोक लगाना है।
क्या है नई SOP में खास?
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नई SOP लागू होने के बाद सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को हर सप्ताह अपने दवा भंडार की सघन समीक्षा करनी होगी। इस जांच के दौरान हर दवा की निर्माण तिथि (manufacturing date) और समाप्ति तिथि (expiry date) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अगर कोई दवा 24 घंटे पहले भी एक्सपायर हो चुकी है, तो उसे तत्काल स्टॉक से हटाकर नष्ट करना अनिवार्य होगा।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
नियमों का पालन न करने वाले अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। अधिकारी के मुताबिक, यदि साप्ताहिक समीक्षा में किसी अस्पताल में गंभीर लापरवाही पाई जाती है या बार-बार एक्सपायर्ड दवाएं मिलती हैं, तो स्वास्थ्य विभाग की तरफ से उस अस्पताल प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
क्यों पड़ी इस कदम की ज़रूरत?
यह फैसला पिछले कुछ सालों में मिली कई गंभीर शिकायतों के बाद लिया गया है। शिकायतों में आरोप था कि सरकारी अस्पतालों में नई माताओं और नवजात शिशुओं को एक्सपायर्ड सलाइन और रिंगर्स लैक्टेट जैसी दवाएं चढ़ा दी गईं। इसके अलावा, यह भी सामने आया था कि सरकारी अस्पतालों से पुरानी और एक्सपायर हो चुकी दवाएं अवैध तरीके से स्वास्थ्य शिविरों तक पहुंच रही थीं, जिससे आम लोगों की जान को खतरा पैदा हो रहा था।
इनपुट: IANS



