बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव: 35 साल में पहली बार मतदान की संभावना, 20 अगस्त को होगा चुनाव
बांग्लादेश में 20 अगस्त को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 1991 से चली आ रही निर्विरोध राष्ट्रपति चुने जाने की…
बांग्लादेश में 20 अगस्त को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 1991 से चली आ रही निर्विरोध राष्ट्रपति चुने जाने की परंपरा इस बार टूट सकती है और 35 वर्षों में पहली बार देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए मतदान की नौबत आ सकती है।
यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई है क्योंकि सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और मुख्य विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन, दोनों ने ही अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। 24 जुलाई को राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद यह पद खाली हो गया था। फिलहाल, राष्ट्रीय संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभा रहे हैं।
उम्मीदवार और चुनावी गणित
बांग्लादेश के अखबार 'द डेली स्टार' ने पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया है कि बीएनपी की ओर से पार्टी महासचिव और मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन सहमति फॉर्म पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। हालांकि, भले ही चुनाव लड़ा जाए, सत्ताधारी बीएनपी के पास स्पष्ट बहुमत है। 2026 के संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 210 सीटें जीती थीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को केवल 77 सीटें मिली थीं।
विपक्ष की उम्मीदवारी एक 'सियासी रणनीति'
विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष का चुनाव लड़ना हार निश्चित होने के बावजूद एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मंजिल मोर्शेद ने 'ढाका ट्रिब्यून' से कहा, “विपक्ष जानता है कि वह चुनाव हार जाएगा। फिर भी, उम्मीदवार खड़ा करना एक सियासी रणनीति है।” उन्होंने आगे कहा, “मेरा मानना है कि हो सकता है कि दिखावे के लिए उम्मीदवार खड़ा किया जा रहा हो ताकि कोई उन पर चुनाव में हिस्सा न लेने का आरोप न लगा सके या इस मामले पर सवाल न उठा सके।”
इसी तरह, चुनाव विशेषज्ञ बदीउल आलम मजूमदार ने भी कहा, “राष्ट्रपति चुनाव पहले से तय होता है। सत्तारूढ़ दल जिसे चाहेगा, वही राष्ट्रपति बनेगा।” बांग्लादेश चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, अगर एक से ज्यादा उम्मीदवार होते हैं तो नेशनल पार्लियामेंट बिल्डिंग में संसद सदस्य गुप्त मतदान के जरिए नए राष्ट्रपति का चुनाव करेंगे। संविधान के मुताबिक, पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।
इनपुट: IANS



