बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य: भारतीय नौसेना ने दो तेल टैंकरों को उच्च-जोखिम वाले क्षेत्र से सुरक्षित निकाला
अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के एक बेहद अहम और संवेदनशील मार्ग, बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से भारतीय नौसेना ने कच्चे तेल ले जा रहे दो टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलतापूर्वक मदद की है। समाचार…
अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के एक बेहद अहम और संवेदनशील मार्ग, बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से भारतीय नौसेना ने कच्चे तेल ले जा रहे दो टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलतापूर्वक मदद की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 9 और 10 अगस्त को इस अभियान को अंजाम दिया गया, जिससे भारत की महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग हाल के समय में समुद्री सुरक्षा के बढ़ते खतरों के कारण वाणिज्यिक जहाजों के लिए एक उच्च जोखिम वाला क्षेत्र बन गया है। इसी पृष्ठभूमि में, भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल और आईएनएस आदित्य ने कच्चे तेल के टैंकरों एमटी कम्पास और एमटी थालत्ता को इस संवेदनशील रास्ते से सुरक्षित पार कराया।
समुद्री हितों की सुरक्षा
भारतीय नौसेना ने इस कार्रवाई को अपनी उस प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया है, जिसके तहत वह भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और महत्वपूर्ण ऊर्जा कार्गो के सुरक्षित पारगमन को सुनिश्चित करने के लिए काम करती है। यह अभियान ऐसे समय में हुआ है जब लाल सागर, अदन की खाड़ी और आस-पास के समुद्री इलाकों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
एजेंसी के मुताबिक, भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत इस क्षेत्र में लगातार मिशन पर तैनात हैं। आईएनएस इम्फाल, आईएनएस त्रिशूल और आईएनएस आदित्य जैसे जहाज समुद्री सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे का मुकाबला करने, नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और महत्वपूर्ण कार्गो की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह सतर्क हैं।
रणनीतिक उपस्थिति
इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निरंतर उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत हिंद महासागर से लेकर अदन की खाड़ी तक वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा में एक सक्रिय भूमिका निभा रहा है। नौसेना बाब-अल-मंडेब के अलावा अन्य रणनीतिक समुद्री मार्गों पर भी बदलते सुरक्षा हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
इनपुट: IANS



