सोमवार, 10 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत के विशाल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स: 40 लाख करोड़ की योजना में से आधी से ज़्यादा रक़म ख़र्च

भारत में चल रही 1,847 बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर पूँजीगत ख़र्च का आँकड़ा 21.97 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह रक़म इन परियोजनाओं के…

भारत के विशाल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स: 40 लाख करोड़ की योजना में से आधी से ज़्यादा रक़म ख़र्च
(फोटो: IANS)

भारत में चल रही 1,847 बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर पूँजीगत ख़र्च का आँकड़ा 21.97 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह रक़म इन परियोजनाओं के लिए निर्धारित कुल 40.54 लाख करोड़ रुपए के निवेश का 54 प्रतिशत से भी ज़्यादा है। केंद्र सरकार द्वारा सोमवार को जारी एक फैक्टशीट में यह बताया गया कि देश के आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन के लिए ये प्रोजेक्ट्स बेहद अहम हैं।

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इन परियोजनाओं में से कई अब पूरा होने की एडवांस स्टेज पर हैं। आँकड़ों के मुताबिक़, क़रीब 709 प्रोजेक्ट्स 80 प्रतिशत से ज़्यादा विकसित हो चुके हैं, जबकि 337 अन्य परियोजनाओं में 80 फ़ीसदी से अधिक वित्तीय काम पूरा हो चुका है। कनेक्टिविटी पर सरकार के विशेष ज़ोर को देखते हुए, सबसे ज़्यादा प्रोजेक्ट्स परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में हैं। इस सेक्टर में कुल 1,341 परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनकी लागत 22.32 लाख करोड़ रुपए है।

डिजिटल निगरानी का नया सिस्टम: PAIMANA

इन विशाल परियोजनाओं की कुशल निगरानी के लिए सरकार एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल कर रही है, जिसका नाम 'पाइमाना' (PAIMANA) है। इसका पूरा नाम 'राष्ट्र-निर्माण के लिए प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स' है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा विकसित यह प्लेटफ़ॉर्म 150 करोड़ रुपए या उससे अधिक लागत वाली सभी केंद्रीय क्षेत्र की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर नज़र रखता है।

निगरानी व्यवस्था को और मज़बूत करने के लिए, इसी साल 16 अप्रैल को 'पाइमाना' के तहत एक समर्पित 'परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड' भी लॉन्च किया गया था। यह डैशबोर्ड बिजली, नागरिक उड्डयन, दूरसंचार, रेलवे, सड़क, और बंदरगाह जैसे छह प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्रों के प्रदर्शन संकेतकों को एक ही जगह पर दिखाता है। हाल ही में 54 नए संकेतकों को जोड़कर इसका विस्तार किया गया है, जिससे अब इस पर कुल 165 संकेतकों की निगरानी की जा सकती है। यह डैशबोर्ड नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं को डेटा विश्लेषण में भी मदद करता है।

इनपुट: IANS

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