भारतीय शेयर बाज़ार में देसी निवेशकों का दबदबा, लगातार तीसरे साल निवेश 5 लाख करोड़ के पार
भारतीय शेयर बाज़ार में घरेलू निवेशकों का भरोसा लगातार मज़बूत हो रहा है। विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव के बावजूद देसी संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाज़ार को बड़ा सहारा दिया है। समाचार एजेंसी IANS से मिले आंकड़ों…
भारतीय शेयर बाज़ार में घरेलू निवेशकों का भरोसा लगातार मज़बूत हो रहा है। विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव के बावजूद देसी संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाज़ार को बड़ा सहारा दिया है। समाचार एजेंसी IANS से मिले आंकड़ों के अनुसार, इस साल 7 अगस्त तक घरेलू निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में 5.13 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया है। यह लगातार तीसरा साल है जब उनका निवेश इस अहम पड़ाव को पार कर गया है।
पिछले साल, यानी 2025 में इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 4.48 लाख करोड़ रुपए था। इससे पता चलता है कि घरेलू निवेश की रफ़्तार इस साल और भी तेज़ हुई है। आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2023 से पिछले 36 महीनों में घरेलू निवेशकों ने कुल 19.21 लाख करोड़ रुपए भारतीय इक्विटी बाज़ार में लगाए हैं।
विदेशी बिकवाली का असर किया कम
घरेलू निवेशकों का यह प्रवाह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली से पैदा हुए दबाव को संतुलित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 36 महीनों में जब देसी निवेशकों ने 19.21 लाख करोड़ की खरीदारी की, उसी दौरान FPI ने करीब 10 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इस तरह, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाज़ार में स्थिरता बनाए रखी।
निवेशकों के भरोसे के पीछे क्या है?
बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती और म्यूचुअल फंड के ज़रिए आम लोगों की बढ़ती भागीदारी इस मज़बूत घरेलू निवेश का मुख्य कारण है। विश्लेषकों के अनुसार, हाल के महीनों में जीएसटी संग्रह का बेहतर रहना और आर्थिक मोर्चे पर किसी बड़ी नकारात्मक ख़बर का न होना भी निवेशकों के भरोसे को बढ़ा रहा है। इसके अलावा, ऊर्जा की कीमतों में नरमी और कंपनियों की कमाई में सुधार जैसे कारकों ने भी भारतीय बाज़ार को आकर्षक बनाया है।
किन सेक्टरों पर रहा ज़ोर?
जून 2026 में समाप्त तिमाही के दौरान, DII ने उपभोक्ता क्षेत्र, सरकारी बैंकों (PSU Banks), ऊर्जा, दूरसंचार, धातु और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में ज़्यादा दिलचस्पी दिखाई। वहीं, इस दौरान उन्होंने निजी बैंकों, कैपिटल गुड्स, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों में अपना निवेश अपेक्षाकृत कम रखा। DII में मुख्य रूप से बैंक, बीमा कंपनियाँ, पेंशन फंड और म्यूचुअल फंड शामिल होते हैं।
इनपुट: IANS



