सोमवार, 10 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

यूपी: भाजपा के '80 बनाम 20' की काट? 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पर समाजवादी पार्टी

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बिसात बिछने लगी है। भारतीय जनता पार्टी के '80 बनाम 20' वाले हिंदुत्व नैरेटिव के जवाब में समाजवादी पार्टी अब 'पीडीए' के साथ-साथ 'सॉफ्ट…

यूपी: भाजपा के '80 बनाम 20' की काट? 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पर समाजवादी पार्टी
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बिसात बिछने लगी है। भारतीय जनता पार्टी के '80 बनाम 20' वाले हिंदुत्व नैरेटिव के जवाब में समाजवादी पार्टी अब 'पीडीए' के साथ-साथ 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की रणनीति पर भी काम करती दिख रही है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, पार्टी का यह बदला हुआ रुख इस बात का संकेत है कि वह भाजपा को उसी के मजबूत सियासी मैदान में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

विज्ञापन

विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव की पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक से आगे निकलकर दूसरे वर्गों के बीच भी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है। मंदिर, धर्म और हिंदू आस्था से जुड़े मुद्दों पर सपा की बढ़ी सक्रियता इसी राजनीतिक विस्तार की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।

बदलती रणनीति के संकेत

हाल के दिनों में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं। जब मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ियों पर फूल बरसाए, तो सपा कार्यकर्ताओं ने भी हाईवे पर शिवभक्तों का स्वागत पुष्पवर्षा से किया। इसी तरह, इटावा में केदारनाथ की तर्ज पर केदारेश्वर मंदिर का निर्माण और पार्टी दफ्तर के बाहर 'सनातन ही समाजवाद है' जैसे पोस्टर भी इस बदलाव की ओर इशारा करते हैं।

राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि अखिलेश यादव की मंदिरों में बढ़ती सक्रियता, संतों से मुलाकात और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भेंट इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा है। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी के मुद्दे को सपा द्वारा प्रमुखता से उठाना भी इसी क्रम में देखा जा रहा है।

क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञ?

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रतन मणि लाल का मानना है कि अखिलेश यादव को यह एहसास हो गया है कि सत्ता तक पहुंचने के लिए सिर्फ 'एमवाई' जैसा सीमित सामाजिक समीकरण काफी नहीं है। उनके अनुसार, सपा यह संदेश देना चाहती है कि हिंदुत्व पर किसी एक दल का एकाधिकार नहीं है।

वहीं, एक अन्य विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण प्रभावी रहा, लेकिन भाजपा के आक्रामक हिंदुत्व का मुकाबला करने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व से पूरी तरह दूरी बनाना मुश्किल है।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर

सपा के इस रुख पर भाजपा ने निशाना साधा है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने इसे दिखावे की राजनीति बताते हुए कहा कि सपा का अतीत सनातन विरोधी रहा है और वह चुनावी लाभ के लिए अपना रुख बदलने का दिखावा कर रही है।

इसके जवाब में सपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक यादव ने कहा, "भाजपा सनातन को राजनीतिक औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। हम भाजपा के छद्म और नफरती सनातन के विरोधी हैं, सनातन के नहीं। हमारा सनातन स्वामी विवेकानंद का समावेशी सनातन है।"

इनपुट: IANS

N

News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से उत्तर प्रदेश से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →