राजस्थान OBC सर्वे: 7 समुदाय आबादी में 55% हिस्सेदार, सरकारी नौकरियों में भारी असमानता
राजस्थान में आगामी पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले, राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आबादी को लेकर एक विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी कर दी गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस…
राजस्थान में आगामी पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले, राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आबादी को लेकर एक विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी कर दी गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस रिपोर्ट में प्रदेश के ओबीसी समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का व्यापक विश्लेषण किया गया है, जिससे कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि कुल ओबीसी आबादी का आधे से ज़्यादा (55.14%) हिस्सा सिर्फ सात प्रमुख समुदायों से आता है। इनमें जाट और जाट सिख समुदाय 20.14% के साथ सबसे बड़े समूह के रूप में उभरे हैं।
आबादी और रोज़गार में किसका कितना हिस्सा?
रिटायर्ड जस्टिस मदनलाल भाटी की अध्यक्षता वाले आयोग द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कुल 92 ओबीसी समुदायों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें 'सबसे पिछड़े वर्ग' (MBC) के पांच समुदाय भी शामिल थे। सर्वे के मुताबिक, राज्य में कुल ओबीसी आबादी 3.63 करोड़ से अधिक है।
आबादी में शीर्ष 7 समुदाय:
- जाट/जाट सिख: 20.14%
- गुर्जर: 9.11%
- कुम्हार/कुमावत: 8.36%
- माली/सैनी/बागवान: 7.80%
- जांगिड़/सुथार: 3.49%
- यादव/अहीर: 3.22%
- मेव: 3.02%
सर्वे में सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व की बड़ी असमानता भी उजागर हुई है। राज्य में करीब 3.92 लाख ओबीसी सरकारी कर्मचारी हैं, लेकिन इनमें से लगभग 78% हिस्सा सिर्फ जाट, गुर्जर, सैनी और यादव समुदाय से है। वहीं, 18 ओबीसी समुदाय ऐसे भी हैं, जिनके 100 से भी कम सदस्य सरकारी सेवा में हैं।
चुनावों और आरक्षण के लिए अहम रिपोर्ट
यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' फ्रेमवर्क के आधार पर तैयार की गई है, जो पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगी। अधिकारियों का मानना है कि इसके निष्कर्षों का आगामी चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया और समावेशी प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
सर्वे में यह भी पाया गया कि लगभग 12.50 लाख ओबीसी लोग स्वरोजगार में लगे हैं, जिनमें कुम्हार-कुमावत, जाट और माली-सैनी समुदाय प्रमुख हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुल ओबीसी आबादी में पुरुषों की संख्या 1.87 करोड़ (52.23%) और महिलाओं की 1.71 करोड़ (47.76%) है, जिससे लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 914 महिलाएं है। यह रिपोर्ट नीति-निर्माण के लिए एक अहम सांख्यिकीय आधार प्रदान करती है।
इनपुट: IANS



