आगरा में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, नौकरी के नाम पर 15 राज्यों में 2500 लोगों से ठगी
उत्तर प्रदेश के आगरा में एक ऐसे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है, जो पिछले दो सालों से नौकरी का झांसा देकर लोगों को अपना शिकार बना रहा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरोह ने देश…
उत्तर प्रदेश के आगरा में एक ऐसे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है, जो पिछले दो सालों से नौकरी का झांसा देकर लोगों को अपना शिकार बना रहा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरोह ने देश के 15 राज्यों में करीब 2,500 लोगों के साथ धोखाधड़ी की है। इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
आगरा के पुलिस उपायुक्त (साइबर क्राइम) आदित्य कुमार ने बताया कि यह गिरोह एक ऐसी कंपनी में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करता था, जिसका कोई कानूनी अस्तित्व ही नहीं था। आरोपियों में से एक बिहार का रहने वाला है और उस पर पहले से ही एक आपराधिक मामला दर्ज है। दूसरा आरोपी उत्तर प्रदेश के जौनपुर का है, जबकि गिरफ्तार की गईं दोनों महिलाएं आगरा की ही रहने वाली हैं।
ऐसे करते थे तीन चरणों में धोखाधड़ी
पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह पूरा खेल तीन चरणों में चलता था। सबसे पहले, आरोपी संभावित उम्मीदवारों को फोन करके कंपनी में 'वैकेंसी' होने की जानकारी देते थे। फिर उनसे QR कोड या UPI के जरिए 'रजिस्ट्रेशन फीस' जमा करने को कहा जाता था।
डीसीपी आदित्य कुमार ने विस्तार से बताया, "दूसरे चरण में जब पीड़ित भरोसा कर लेते थे तो आरोपी उनसे उस फर्म में 'सुपरवाइजर' या 'गार्ड' की पोस्ट के लिए लगभग 8,800 रुपए अतिरिक्त देने के लिए कहते थे।" पैसे मिलने के बाद, तीसरे चरण में पीड़ितों से फर्जी जॉइनिंग लेटर के लिए करीब 10,000 रुपए और वसूले जाते थे।
बड़ी मात्रा में सामान बरामद
यह संयुक्त ऑपरेशन काउंटर-इंटेलिजेंस टीम, साइबर सर्विलांस टीम और ताजगंज थाने के पुलिसकर्मियों ने मिलकर चलाया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 10 मोबाइल फोन, 35 बैंक पासबुक, 28 एटीएम कार्ड, कई चेक बुक, 8 सिम कार्ड, 7 आधार कार्ड, 6 पैन कार्ड, 2 वोटर आईडी कार्ड, 12 क्यूआर कोड, एक लैपटॉप और एक डेस्कटॉप समेत अन्य चीजें बरामद की गई हैं।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन धोखेबाजों को पीड़ितों के संपर्क नंबर कैसे मिलते थे और ठगी से कमाए गए पैसों का इस्तेमाल कहाँ किया गया।
इनपुट: IANS



