बांग्लादेश में गहराता गैस संकट: उत्पादन ठप, हजारों मजदूरों के रोजगार पर खतरा
बांग्लादेश के औद्योगिक क्षेत्र इस समय एक गंभीर गैस संकट से जूझ रहे हैं, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कपड़ा, गारमेंट और स्टील जैसे उद्योगों पर पड़ रहा है। समाचार एजेंसी…
बांग्लादेश के औद्योगिक क्षेत्र इस समय एक गंभीर गैस संकट से जूझ रहे हैं, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कपड़ा, गारमेंट और स्टील जैसे उद्योगों पर पड़ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 21 जुलाई से शुरू हुई गैस की कमी अब इस हद तक बढ़ गई है कि कई कारखानों में उत्पादन घटाना पड़ा है, कुछ इकाइयां पूरी तरह बंद हो गई हैं और हजारों श्रमिकों को छुट्टी पर भेजने की नौबत आ गई है।
यह संकट बुधवार को तब और गहरा हो गया जब एक्सेलरेट एनर्जी का एलएनजी टर्मिनल गैस भंडार खत्म होने के कारण बंद हो गया। राष्ट्रीय ग्रिड में उपलब्ध गैस का अधिकांश हिस्सा बिजली संयंत्रों को दिया जा रहा है, जिससे उद्योगों के लिए आपूर्ति लगभग ठप पड़ गई है।
कपड़ा उद्योग पर सबसे बड़ी मार
इस गैस संकट का सबसे बुरा प्रभाव नरसिंदी जिले पर पड़ा है, जो देश की लगभग 70 प्रतिशत कपड़ों की जरूरत पूरी करता है। यहां पिछले दो दिनों में 100 से अधिक कपड़ा मिलों में उत्पादन पूरी तरह से बंद हो गया है। उद्योगपतियों के मुताबिक, गैस का सामान्य दबाव जो 15 पीएसआई होना चाहिए, वह घटकर पहले 2-4 पीएसआई हुआ और अब लगभग शून्य पर आ गया है। इसके अलावा, गाजीपुर, नारायणगंज और सावर के रेडीमेड गारमेंट उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
लागत बढ़ी, उत्पादन घटा
संकट से निपटने के लिए कई कारखाने महंगे विकल्पों का सहारा ले रहे हैं। गैस से चलने वाले बॉयलर और कैप्टिव पावर प्लांट अब महंगे ईंधन से चलाए जा रहे हैं, जिससे परिचालन लागत में लगभग पांच गुना की भारी वृद्धि हुई है। उत्पादन जारी रखने की कोशिश में कई फैक्ट्रियां कर्मचारियों से अलग-अलग शिफ्ट में काम करवा रही हैं, इसके बावजूद उत्पादन में 20-25 प्रतिशत की गिरावट आई है। मयमनसिंह के भालुका औद्योगिक क्षेत्र में स्थिति इतनी गंभीर है कि 20 कारखानों को अपने कर्मचारियों को आंशिक रूप से छुट्टी पर भेजना पड़ा है।
व्यापक आर्थिक प्रभाव का खतरा
बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मोर्शेद सरवर सोहेल ने कहा कि यह संकट सिर्फ फैक्ट्री मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर श्रमिकों और पूरी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उत्पादन बंद होने या कम होने के बावजूद कारखानों को कर्मचारियों का वेतन देना पड़ रहा है। साथ ही, निर्यात में देरी होने से समय पर शिपमेंट पूरा न कर पाने और महंगे हवाई भाड़े का उपयोग करने का जोखिम भी बढ़ गया है। चट्टोग्राम और कर्णफुली जैसे अन्य प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में भी फैक्ट्रियां अपनी क्षमता से बहुत कम पर काम कर रही हैं।
इनपुट: IANS



