सुप्रीम कोर्ट ने कहा 'यह नारीत्व का अपमान', IOCL महिला को नौकरी न देने पर 12 लाख का मुआवजा देगा
सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) को एक महिला को नौकरी देने से इनकार करने पर 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने नौकरी के लिए महिला को अनुपयुक्त बताने के पीछे…
सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) को एक महिला को नौकरी देने से इनकार करने पर 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने नौकरी के लिए महिला को अनुपयुक्त बताने के पीछे दिए गए तर्कों को 'नारीत्व का अपमान' करार दिया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अरविंद कुमार और विपुल एम. पंचोली की बेंच ने यह फैसला सुनाया।
यह मामला सालों पुरानी कानूनी लड़ाई से जुड़ा है, जहाँ एक महिला ने गुढ़ा स्थित IOCL के LPG बॉटलिंग प्लांट में नौकरी न मिलने को चुनौती दी थी। महिला ने कैजुअल खलासी/चपरासी पद के लिए इंटरव्यू दिया था, लेकिन उसे यह कहकर खारिज कर दिया गया कि काम में शारीरिक मेहनत, LPG सिलेंडर उठाना और नाइट शिफ्ट शामिल है।
लिंग के आधार पर भेदभाव पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने IOCL के इस रुख पर तीखे सवाल उठाए। जस्टिस अरविंद कुमार की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, "आपने सिर्फ इसलिए उसे नौकरी नहीं दी, क्योंकि वह एक महिला है? यह नारीत्व का अपमान है।" अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि यह काम महिलाओं के लिए अनुपयुक्त है। बेंच ने टिप्पणी की, "हम भारत से हैं और हर दिन हम कहते हैं कि हम महिलाओं का सम्मान करते हैं और वे देवी के समान हैं... वे (महिलाएं) रोजाना अपने घरों में गैस सिलेंडर उठाती हैं। जब पुरुष घर पर नहीं होते, तो वही गैस सिलेंडर बदलती हैं।"
लंबी कानूनी लड़ाई और मुआवज़े का फैसला
यह देखते हुए कि महिला अब सेवानिवृत्ति की उम्र तक पहुंच चुकी है, अदालत ने उसे नौकरी पर बहाल करने के बजाय एकमुश्त मुआवजा देना उचित समझा। कोर्ट ने कहा, "वह अब रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंच चुकी है, लेकिन उसने लगातार अपने अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी है। हम उसे एकमुश्त मुआवजा देंगे।"
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक समिति ने नौकरी के लिए 49 उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश की थी, जिसमें यह महिला भी शामिल थी। इंटरव्यू के बाद 43 उम्मीदवारों को चुन लिया गया, लेकिन महिला को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि वह एक महिला होने के नाते इस काम के लिए उपयुक्त नहीं है।
इसके बाद महिला ने निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। हालांकि, IOCL ने इस फैसले को पहली अपीलीय अदालत में चुनौती दी, जिसने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। बाद में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी अपीलीय अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए महिला की अपील खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
इनपुट: IANS



