AI बूम और मध्य-पूर्व संकट: IMF ने दुनिया की अर्थव्यवस्था में बढ़ती खाई पर जताई चिंता
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी नई रिपोर्ट में दुनिया की अर्थव्यवस्था के दो हिस्सों में बंटने की चेतावनी दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चिप सप्लाई…
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी नई रिपोर्ट में दुनिया की अर्थव्यवस्था के दो हिस्सों में बंटने की चेतावनी दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चिप सप्लाई चेन से जुड़े कुछ देश तेजी से तरक्की कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और ऊर्जा के बढ़ते दामों के कारण कई अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव है।
IMF ने अपनी अक्टूबर 2026 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में इस 'विभाजित वैश्विक अर्थव्यवस्था' की तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी बदलाव मिलकर यह स्थिति पैदा कर रहे हैं, जहाँ कुछ देशों को बेहतर कारोबारी माहौल, तकनीकी निर्यात और निवेश का फायदा मिल रहा है, जबकि कई देश महंगे आयात और कमजोर मांग से जूझ रहे हैं।
कौन फायदे में, कौन नुकसान में?
इस नई तकनीकी होड़ का सबसे बड़ा लाभार्थी ताइवान बनकर उभरा है। IMF का अनुमान है कि 2026 में उसकी आर्थिक वृद्धि दर 10.7% तक पहुंच सकती है, जो 2025 में 8.8% थी। हालांकि, 2027 में इसके धीमे होकर 4.3% पर आने की संभावना है। इसी तरह दक्षिण कोरिया की वृद्धि दर भी 2025 के 1.1% से बढ़कर 2026 में 3.3% रहने का अनुमान है। वियतनाम (8.4%) और मलेशिया (5.2%) जैसी दक्षिण-पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाएं भी डेटा सेंटर और वैश्विक टेक्नोलॉजी में तेजी का लाभ उठा रही हैं।
रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि AI से जुड़ा फायदा कुछ ही देशों तक सीमित है। उदाहरण के लिए, उन्नत सेमीकंडक्टर के वैश्विक व्यापार का लगभग 62% हिस्सा सिर्फ ताइवान और कोरिया से आता है। वहीं, चीन और अमेरिका मिलकर AI कंप्यूटिंग हार्डवेयर के कुल आयात का 75% से अधिक हिस्सा खरीदते हैं।
ऊर्जा आयातक देशों पर बढ़ता दबाव
IMF ने चेतावनी दी है कि जो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं और तकनीकी मूल्य श्रृंखला का हिस्सा नहीं हैं, वे सबसे अधिक दबाव में रहेंगे। उन्हें आयात की ऊंची लागत, मुद्रा पर दबाव, वास्तविक आय में कमी और सीमित वित्तीय संसाधनों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कई कम आय वाले देश इसी श्रेणी में आते हैं, जिससे वैश्विक आय असमानता बढ़ने का खतरा है।
भारत एक अपवाद
इस मुश्किल दौर में IMF ने भारत को एक अपवाद माना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा आयातक होने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को मध्यम अवधि में नकारात्मक प्रभावों से अलग रखा गया है। इसका कारण चिप निर्यात पर निर्भरता के बजाय मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की ताकत है।
भविष्य के जोखिम और चुनौतियां
IMF ने भविष्य को लेकर सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि तरक्की इस बात पर निर्भर करेगी कि देश AI को कितनी कुशलता से अपनाते हैं और अपनी ऊर्जा जरूरतों को कैसे पूरा करते हैं। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर AI से उत्पादकता बढ़ने की उम्मीदें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गईं, तो इस क्षेत्र में निवेश की रफ्तार अचानक थम सकती है, जिससे शेयर बाजारों में भी जोखिम बढ़ सकता है।
इनपुट: IANS



