यूपी: वोटर लिस्ट से नाम काटने पर विवाद, चुनाव आयोग ने अखिलेश यादव के दावों को भ्रामक बताया
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से हज़ारों नाम हटाए जाने को लेकर उठे विवाद पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने अपनी सफाई पेश की है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा प्रक्रिया पर…
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से हज़ारों नाम हटाए जाने को लेकर उठे विवाद पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने अपनी सफाई पेश की है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद आयोग ने कहा कि 85,854 लोगों के नाम काटने के लिए स्वतः फॉर्म-7 तैयार किए जाने का दावा भ्रामक है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर स्पष्ट किया कि सभी मामलों में पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। आयोग ने अपने पोस्ट में लिखा, “यूपी एसआईआर में 85,854 फार्म-7 स्वतः बनाकर बिना कारण मतदाताओं के नाम हटाने का दावा भ्रामक है। संबंधित मामलों में नोटिस, सुनवाई, जांच और आदेश के बाद कार्रवाई हुई।” आयोग ने यह भी कहा कि 6 मार्च के बाद के लंबित मामलों पर भी नियमानुसार ही निर्णय लिए गए हैं और लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों पर विश्वास करने की अपील की है।
सपा अध्यक्ष ने क्या आरोप लगाए थे?
दरअसल, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को भेदभावपूर्ण बताते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि इस पूरी प्रक्रिया को अब शून्य कर दिया गया है, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च हुए थे और पूरा प्रशासन लगा था।
अखिलेश यादव ने दावा किया था कि एसआईआर के बावजूद मतदाता सूची में लाखों फर्जी वोट जोड़े गए। उन्होंने आरोप लगाया, “कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के दो-दो, तीन-तीन, चार-चार, पांच-पांच और यहां तक कि दस-दस वोट तक बने हैं।” सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा था कि चुनाव आयोग को अपनी विश्वसनीयता साबित करनी चाहिए और निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए।
इनपुट: IANS



