चेन्नई: किराया बढ़ाने की मांग को लेकर ऑटो चालक निकालेंगे कैंडललाइट मार्च, 10 साल से नहीं बदलीं दरें
चेन्नई में ऑटो-रिक्शा चालकों ने अपनी लंबे समय से लंबित किराया संशोधन की मांग को लेकर सरकार का ध्यान खींचने के लिए एक कैंडललाइट मार्च निकालने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह विरोध…
चेन्नई में ऑटो-रिक्शा चालकों ने अपनी लंबे समय से लंबित किराया संशोधन की मांग को लेकर सरकार का ध्यान खींचने के लिए एक कैंडललाइट मार्च निकालने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन मंगलवार शाम को एग्मोर से फोर्ट सेंट जॉर्ज तक आयोजित किया जाएगा, जिसका नेतृत्व फेडरेशन ऑफ ऑल ऑटो ट्रेड यूनियंस कर रहा है।
यह मार्च हाल ही में आत्महत्या करने वाले 61 वर्षीय ड्राइवर मोहम्मद इब्राहिम को श्रद्धांजलि देने का भी एक माध्यम है। व्यासार्पडी के रहने वाले इब्राहिम ने अपनी जान देने से पहले एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से ऑटो का किराया बढ़ाने की गुहार लगाई थी। यूनियन इस मार्च के ज़रिए यह उजागर करना चाहती हैं कि कैसे बढ़ते खर्च और यात्रा के बदलते तरीकों ने ड्राइवरों की आजीविका पर गहरा असर डाला है।
क्यों जरूरी है किराया संशोधन?
फेडरेशन के समन्वयक एस. बालासुब्रमण्यम ने बताया कि सरकार ने आखिरी बार 2013 में किराए में संशोधन किया था। तब से लेकर आज तक ईंधन की कीमतों, बीमा प्रीमियम और स्पेयर पार्ट्स की लागत में भारी वृद्धि के बावजूद, चालक पुरानी दरों पर काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि इस देरी का सीधा बोझ ड्राइवरों पर पड़ रहा है, जिनकी आय लगातार घट रही है। बालासुब्रमण्यम ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले किराया संशोधनों के दौरान मीटर लागू करने को लेकर परिवहन अधिकारियों और पुलिस द्वारा ड्राइवरों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।
अन्य चुनौतियां और प्रमुख मांगें
यूनियनों का तर्क है कि ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-आधारित एग्रीगेटर 'सर्ज प्राइसिंग' के ज़रिए ज़्यादा किराया वसूलते हैं, जिससे व्यक्तिगत ऑटो ऑपरेटरों को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, चेन्नई मेट्रो रेल के विस्तार, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और बाइक-टैक्सी सेवाओं के आने से भी ऑटो की मांग प्रभावित हुई है।
फेडरेशन की मुख्य मांगों में मीटर के हिसाब से संशोधित किराया लागू करना और ऑटो-रिक्शा के लिए एक सरकार समर्थित मोबाइल एप्लिकेशन बनाना शामिल है। वे सरकार से बाइक-टैक्सी सेवाओं को विनियमित या प्रतिबंधित करने और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की भी अपील कर रहे हैं। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो ड्राइवरों और उनके परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
इनपुट: IANS



