विकसित भारत रोजगार योजना: पहले साल में 72 लाख से ज़्यादा लोगों को मिला संगठित क्षेत्र में रोज़गार
देश में औपचारिक यानी संगठित क्षेत्र के वर्कफ़ोर्स को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना' (पीएम-वीबीआरवाई) ने अपने पहले ही साल में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है…
देश में औपचारिक यानी संगठित क्षेत्र के वर्कफ़ोर्स को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना' (पीएम-वीबीआरवाई) ने अपने पहले ही साल में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के ज़रिए 72 लाख से अधिक ऐसे कर्मचारियों को औपचारिक रोज़गार मिला है, जिन्हें पहली बार नौकरी मिली है। सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह योजना न केवल सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ा रही है, बल्कि कंपनियों को नए रोज़गार पैदा करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है।
दिलचस्प बात यह है कि योजना के तहत लाभ पाने वालों में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएँ हैं। अब तक 15 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार से जुड़ी प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खातों में मिल भी चुकी है। यह योजना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में पंजीकरण और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए देश के संगठित श्रम बाज़ार को मज़बूत करने का काम कर रही है।
कर्मचारियों और कंपनियों के लिए प्रोत्साहन
पीएम-वीबीआरवाई में कर्मचारियों और उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियों, दोनों के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान है।
कर्मचारियों को फ़ायदा: इसके तहत, 1 लाख रुपये प्रति माह तक वेतन पाने वाले ऐसे कर्मचारी जो पहली बार नौकरी कर रहे हैं, उन्हें एक महीने के EPF वेतन के बराबर (अधिकतम 15,000 रुपये तक) की एकमुश्त राशि दी जाती है। यह रक़म दो किस्तों में मिलती है — पहली किस्त 6 महीने की नौकरी पूरी होने पर और दूसरी 12 महीने की लगातार सेवा के साथ-साथ एक वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने पर।
कंपनियों को लाभ: वहीं, नियोक्ताओं यानी कंपनियों को हर योग्य अतिरिक्त कर्मचारी को कम से कम छह महीने तक नौकरी पर रखने के लिए दो साल तक हर महीने 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलता है। यह लाभ उन कर्मचारियों के लिए है जिनका मासिक वेतन 1 लाख रुपये तक है। इससे कंपनियों की भर्ती लागत घटती है और वे कर्मचारियों को लंबे समय तक नौकरी पर रखने के लिए प्रेरित होते हैं।
योजना का बड़ा लक्ष्य और बजट
यह योजना अगस्त 2025 में घोषित की गई थी और इसकी अवधि 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक है। सरकार ने इसके लिए 99,446 करोड़ रुपये का बड़ा बजट आवंटित किया है। योजना का कुल लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार देना है, जिसमें 1.92 करोड़ पहली बार नौकरी पाने वाले शामिल होंगे। इसका एक प्रमुख उद्देश्य युवाओं को EPFO पंजीकरण के ज़रिए संगठित क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित करना है, ख़ासकर श्रम-प्रधान मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में।
इनपुट: IANS



